बलरामपुर। एफटीसी द्वितीय ने दलित उत्पीड़न व दुष्कर्म के अभियुक्त को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोषी को 40 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक दलित व्यक्ति ने 27 अक्तूबर 2001 को थाना तुलसीपुर में मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी छोटी बहन के साथ सरदार गुरदीप सिंह उर्फ राजू ने दुष्कर्म किया और जातिसूचक गालियां दीं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचक ने गुरदीप को दलित उत्पीड़न, दुष्कर्म व गैंगेस्टर एक्ट का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी द्वितीय विमल प्रकाश आर्य ने गुरुदीप को आजीवन कारावास व 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।