बलरामपुर। परिषदीय विद्यालयों में चल रहे नामांकन अभियान के बीच आधार कार्ड की अनिवार्यता अभिभावकों और शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। बच्चों का आधार कार्ड न होने से अभिभावकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, वहीं शिक्षकों को भी नामांकन प्रक्रिया पूरी कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के 1815 परिषदीय विद्यालयों में अभी तक 2,05,322 छात्र-छात्राओं का नामांकन हो चुका है। पिछले वर्ष जिले में कुल 2,27,000 नामांकन हुआ था। विभाग इस बार भी नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान चला रहा है। शिक्षक गांव-गांव जाकर अभिभावकों को बच्चों का प्रवेश कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई अभिभावक मजदूरी और रोजगार के चलते दिनभर बाहर रहते हैं, जिसके कारण दस्तावेज बनवाने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। विद्यालयों में फिलहाल बच्चों का नामांकन कर लिया जाता है, लेकिन बाद में यू-डायस और अपार आईडी बनाने के दौरान आधार कार्ड अनिवार्य होने से समस्या फिर सामने आ जाती है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है और पढ़ाई का समय भी प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि अब आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र जरूरी कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश अभिभावकों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, जिससे आधार बनवाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो गई है। कागजी औपचारिकताओं और स्पष्ट जानकारी के अभाव में अभिभावकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।