बलरामपुर। बाढ़ से बर्बाद हुए 5,732 किसानों पर एक और गाज गिरने वाली है। गत दिनों जिले में आई बाढ़ में 20 हजार से अधिक किसानों की हजारों एकड़ धान की फसल तबाह हो गई थी। मगर महज 5380 किसानों को ही फसल बीमा का लाभ मिल सकेगा। जबकि 5,732 किसान बीमा के लाभ से वंचित हो जाएंगे। इन किसानों को बीमा का लाभ न मिलने का मुख्य कारण गन्ने की खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाना है।
बाढ़ में धान की फसल गंवा चुके किसानों को नियमों के खेल व अपनी ही चालाकी ने तगड़ा झटका दिया है। अधिक धनराशि पाने के लालच ने जिले में 5,732 किसान बीमा क्षतिपूर्ति पाने से वंचित रहे गए हैं।
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ फसल के लिए जिले के 11,112 किसानों ने बीमा कराया था। इसमें से 5,380 किसान ऐसे हैं जिनका बीमा धान की फसल पर था जबकि शेष बचे 5,732 किसानों ने गन्ने की फसल के लिए बीमा कराया था। ऐसे में धान का बीमा कराने वाले किसानों को ही नुकसान की क्षतिपूर्ति मिल सकेगी। जबकि गन्ने का बीमा कराने वाले किसान धान की फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लाभ से वंचित रह जाएंगे।
बैंक अधिकारी बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड बनवाते समय किसानों से खेत में लगी फसल का खसरा जमा कराया जाता है। इस दौरान अधिक धनराशि का केसीसी बनवाने के लिए किसान गन्ने की बुआई वाला खसरा जमा कर देते हैं। खास बात ये है कि गन्ने की खेती के लिए केसीसी वाले खाते से फसल बीमा नहीं होता है। क्योंकि बलरामपुर जिले में गन्ना बीमा कराने के लिए नोटीफाइड फसल नहीं है।
जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका में 230 ग्राम पंचायतों के 410 राजस्व गांव प्रभावित हुए थे। इन गांवों में रहने वाले 5,380 किसानों ने धान का फसल बीमा कराया था। इन बीमा धारकों को क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।