बलरामपुर/उतरौला। जिले में वोटरलिस्ट से चार लाख 25 हजार से ज्यादा नाम कट सकते हैं। बुधवार को सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार 26.89 फीसदी मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित, पहले से कहीं दूसरी जगह दर्ज हैं या मृतक (एएसडी) श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं।
जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में 15 लाख 83 हजार 27 वोटर फ्रीज मतदाता सूची में दर्ज थे। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में इन वोटरों को गणना प्रपत्र भरना है। 10 दिसंबर सुबह 10 बजे तक 72.89 फीसदी के साथ 11 लाख 53 हजार 863 वोटरों ने गणना प्रपत्र भरकर अपने-अपने बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारियों) के पास जमा कर दिया है। जिले में 26.89 फीसदी वोटरों का नाम मतदाता सूची से कट सकता है। चार लाख 25 हजार 745 वोटरों का नाम मृतक, अनुपस्थित, स्थानांतरित और पहले से दर्ज मतदाता के रूप में चिह्नित किया गया है। जिले में सबसे ज्यादा एक लाख 87 हजार 191 (11.82 फीसदी) मतदाता अनुपस्थित हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर एक लाख 15 हजार 977 (7.33 फीसदी) मतदाता स्थानांतरित हैं। तीसरे नंबर पर 63764 (4.03 फीसदी) मतदाता मृतक में दर्ज हैं। चौथे नंबर पर 35 हजार 89 (2.22 फीसदी) मतदाताओं के नाम पहले से कहीं और दर्ज हैं। अन्य में 23 हजार 724 (1.50 फीसदी) मतदाता दर्ज हैं। (संवाद)
उतरौला में सबसे अधिक नाम कटने की संभावना
विधानसभा क्षेत्र उतरौला में सबसे अधिक एक लाख 27 हजार 586 (29.93 फीसदी) मतदाताओं के नाम कटने की संभावना है। बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक लाख 24 हजार 320 (29.47 फीसदी) मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र में 85 हजार 564 (23.93 फीसदी) मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र में 88 हजार 275 (23.39 फीसदी) मतदाताओं के नाम सूची से कट सकते हैं।
गलत विकल्प भरा तो ईआरओ को दें सुधार के लिए आवेदन
एसआईआर में जिन मतदाताओं ने गलत विकल्प भर दिया है यानी खुद का या माता-पिता या दादा-दादी या नाना-नानी का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में है, पर गणना फाॅर्म में तीसरा विकल्प चुना है तो वे इसे पहले या दूसरे विकल्प में भरने के लिए सुधार का आवेदन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एसडीएम) को दे सकते हैं। वर्ष 2003 में मतदाता का स्वयं का नाम न होने या माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी का नाम न होने पर प्रथम व द्वितीय विकल्प का चयन करना होता है।
एसआईआर के तहत 11 दिसंबर तक गणना फाॅर्म भरकर जमा कर सकते हैं। इसके साथ अभियान में मृतक, अनुपस्थित, जगह छोड़ चुके व पहले से कहीं दूसरी जगह पंजीकृत मतदाताओं को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है।
- ज्योति राय, एडीएम वित्त एवं राजस्व/उप जिला निर्वाचन अधिकारी