बलरामपुर। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत स्वरोजगार के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जिले की 41 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा। इसके लिए इन महिलाओं को कृषि व गैर कृषि आधारित रोजगार से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। स्वरोजगार करने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से आर्थिक मदद मिलेगी।
गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन वरदान बन रही है। पांच साल में जिले में 10,428 महिला समूहों का गठन किया जा चुका है। इसके माध्यम से 1,19,922 महिलाओं को अब तक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो हजार समूहों को बढ़ाने की तैयारी है। इसमें से 41,644 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए कृषि आधारित स्वरोजगार जैसे गेंदा व गुलाब के फूलों की खेती, स्ट्राबेरी फल की खेती, मशरूम उत्पादन, थाई अमरूद की खेती, गन्ना उत्पादन व जैविक सब्जियों का उत्पादन से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही गाय, भैंस, भेड़ व बकरी पालन से होने वाली आय के साथ ही गैस कृषि आधारित कारोबार जैसे गुड़ तैयार करना, शहद उत्पादन, कुल्हड़ निर्माण, अगरबत्ती, मोमबत्ती व सेनेटरी पैड निर्माण से भी महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा।
-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक अनिल द्विवेदी ने बताया कि समूह का गठन होने के समय ही मिशन से 2500 रुपये विस्तार के लिए दिए जाते हैं। तीन माह बाद समूह को कार्य करने के लिए 1500 रुपये दिए जाते हैं। छह माह बाद उस समूह को कृषि व गैर कृषि आधारित कारोबार बढ़ाने के लिए 1.10 लाख रुपये की मदद मिलती है। इसके तीन माह के बाद समूह को बैंक से 1.50 लाख रुपये का ऋण मुहैया कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर ग्राम संगठन के कृषि आजीविका फंड से भी दो लाख रुपये तक की मदद समूह को पहुंचाई जा सकती है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त मंजू त्रिवेदी ने बताया कि समूह की महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए कार्ययोजना को अमल में लाने का कार्य भी शुरू हो गया है। इसके पहले चरण में 528 कम्युनिटी रिर्सोस पर्सन को गोंडा जिले के जिला ग्राम्य विकास संस्थान झंझरी में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। प्रशिक्षण से अब तक 428 ट्रेनर तैयार कर लिए गए हैं। इसके बाद शीघ्र ही सभी ट्रेनर समूह की महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में जुट जाएंगे।