बलरामपुर। सूर्य की उपासना के महापर्व डाला छठ की जिलेभर में धूम है। डाला छठ के दूसरे दिन शनिवार को खरना मनाया गया। खरना में प्रसाद ग्रहण कर महिलाओं ने निर्जल व्रत रखा और तीसरे दिन भी उपवास रहने का संकल्प लिया। व्रती महिलाएं रविवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पुत्रों की खुशहाली एवं परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगेगी।
छठ पूजा पूर्वांचल के जिलों का मुख्य त्योहार है। इसमें सूर्यदेव और छठ मइया की पूजा की जाती है। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को बेटों की सलामती व परिवार की खुशहाली के लिए ये त्योहार मनाया जाता है।
मान्यता है कि पौराणिक काल में भगवान श्रीराम एवं माता सीता ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद दीपावली के छठे दिन सर्वप्रथम भगवान सूर्य एवं छठ माता की पूजा की थी। तभी से ये परंपरा चली आ रही है। षष्टी तिथि से दो दिन पहले नहाय खाय से इस चार दिवसीय त्योहार की शुरूआत होती है। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होता है।
शनिवार को खरना में महिलाओं ने पूड़ी और चावल की खीर पकाकर भोग लगाकर परिवार के सदस्यों एवं अन्य को प्रसाद बांटा। फिर प्रसाद ग्रहण कर महिलाओं ने छठ व्रत की शुरूआत की और तीसरे दिन भी निर्जल व्रत रहने का संकल्प लिया। छठ व्रत रहने वाली प्रतिभा सिंह ने बताया कि महिलाएं रविवार शाम डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी। सोमवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर डाला छठ व्रत का समापन करेंगी।
डाला छठ में डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सैकड़ों व्रती महिलाएं झारखंडी सरोवर पहुंचती हैं। बाढ़ के कारण इस बार झारखंडी सरोवर में काफी गंदगी थी। इसे देखते हुए नगर पालिका प्रशासन की तरफ से शनिवार को टीम लगाकर झारखंडी सरोवर की सफाई कराई गई। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शाबान अली ने स्वयं झारखंडी सरोवर पहुंचकर सफाई कार्य का जायजा लिया।