बलरामपुर। नेपाल से सटे बलरामपुर में एक दो नहीं बल्कि 379 मदरसे बिना मान्यता के संचालित होते पाए गए हैं। इनमें 33 हजार 780 छात्र पढ़ रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि जब इन मदरसों के संचालन के लिए फंड की जानकारी जुटाई गई तो बताया गया कि जकात या चंदे से मिलने वाली रकम से इसका संचालन किया जा रहा है। अब इन मदरसों के प्रबंधकों का विवरण भी मांगा गया है। शासन स्तर पर कार्रवाई की तैयारी के बाद इससे जुड़े लोग बचाव की मुद्रा में आ गए हैं।
वर्ष 2022 में सरकार ने बिना मान्यता हासिल किए संचालित हो रहे मदरसों की जांच का आदेश दिया था। जिला स्तरीय कमेटी को इसका जिम्मा सौंपा गया। टीम ने जब पड़ताल शुरू की तो हकीकत खुलकर सामने आ गई। मदरसे की स्थिति, संचालन करने वाली संस्था, स्थापना, पेयजल व फर्नीचर की उपलब्धता के साथ ही पाठ्यक्रम की पड़ताल की गई। मदरसे की आय का श्रोत क्या है, जब इसकी जांच की गई तो अधिकांश ने बताया कि इनका संचालन जकात या चंदे से मिलने वाले पैसे से किया जाता है।
सबसे ज्यादा गैसड़ी में मिले मदरसे
बलरामपुर सदर ब्लॉक में 56, हरैया सतघरवा में 19, श्रीदत्तगंज ब्लॉक में 12, तुलसीपुर ब्लॉक में 56, गैसड़ी ब्लॉक में 121, पचपेड़वा ब्लॉक में 19, गैंडास बुजुर्ग ब्लॉक में 26, उतरौला में 34 और सादुल्लाह नगर रेहरा बाजार ब्लॉक में 36 मदरसे बिना मान्यता के संचालित मिले हैं। सबसे ज्यादा बिना मान्यता के 121 मदरसे गैसड़ी ब्लॉक में मिले थे। अब एक बार फिर इन मदरसों के प्रबंधकों का विवरण शासन ने मांगा है।
नियुक्तियां भी कटघरे में
अवैध मदरसों के साथ ही अन्य मदरसों में भी विवाद चल रहे हैं। एक मदरसे में नियुक्ति के मामले की जांच लोकायुक्त के आदेश पर जिला प्रशासन कर रहा है। पचपेड़वा व तुलसीपुर में भी कुछ मदरसों की जांच चल रही है।
जिले में बिना मान्यता के 379 मदरसे संचालित हो रहे हैं। सत्यापन के बाद इसकी जानकारी शासन को भेज दी गई है। जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसे उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही जो भी निर्देश मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी। जांच में अभी तक इन मदरसों का संचालन जकात व चंदे के पैसे से किए जाने का मामला आया है।
- बालेंदु द्विवेदी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बलरामपुर