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Balrampur News: बिना फिटनेस फर्राटा भर रहे 32 स्कूली वाहन

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बलरामपुर के एआरटीओ कार्यालय में खडे़े सीज किए गए स्कूली वाहन ।-संवाद
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बलरामपुर। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। निजी स्कूलों द्वारा संचालित बसों और वैन की स्थिति पर नजर डालें तो कई वाहन बिना फिटनेस और आवश्यक दस्तावेज के ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। इससे बच्चों की जिंदगी दांव पर लगी है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले के 170 निजी स्कूलों में कुल 371 छोटे-बड़े स्कूली वाहनों का पंजीकरण है, जिनसे बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इनमें बस, वैन और अन्य वाहन शामिल हैं। जांच में सामने आया कि 371 में से 32 वाहनों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद उनका संचालन जारी है। परिवहन विभाग ने ऐसे सभी 32 वाहन संचालकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र सहित सभी अभिलेख पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि तय समय में दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर वाहनों का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। यही नहीं अब हर स्कूली वाहन के नंबर से उसका पूरा विवरण ऑनलाइन निकाला जा रहा है। इसमें वाहन का पंजीयन, फिटनेस की वैधता, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि वाहन का कब-कब और किन मामलों में चालान हुआ है। जिन वाहनों पर बार-बार यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
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फिटनेस न होने पर एक बस का चालान

बिना फिटनेस के फर्राटा भरने वाली एक स्कूली बस का 31 मार्च को चालान किया गया। 22,250 रुपये का जुर्माना लगाते हुए बस को एआरटीओ कार्यालय में सीज कर दिया गया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई अभियान की शुरुआत है, आगे और भी वाहन जांच के दायरे में आएंगे।

स्कूल बस की टक्कर से जीजा-साले की हो चुकी है मौत

स्कूली वाहनों की लापरवाही का खामियाजा पहले भी सामने आ चुका है। रेहरा बाजार क्षेत्र में 12 नवंबर 2024 को तेज रफ्तार स्कूली बस की टक्कर से बाइक सवार जीजा-साले की मौके पर ही मौत हो गई थी। एएसके मेमोरियल स्कूल की बस सुबह बच्चों को लेकर जा रही थी। धुसवा बाजार-भरतपुर मार्ग पर बस ने सामने से आ रही बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में रामपुर ग्रिंट निवासी शिवधर (45) और उनके साले नरदाहे (40) की मौत हो गई थी। विभागीय जांच में चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और बस के दस्तावेज वैध पाए गए थे, लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना गया था। इस घटना के बाद स्कूली वाहनों की गति, फिटनेस, चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

सवाल तो वाजिब है

-क्या आप स्कूल से बस की फिटनेस रिपोर्ट नहीं मांग सकते?
-कॉपी-किताबें स्कूलों से ही तो बस या वैन बाहरी क्यों?

-स्कूल व बाहरी वैन की दर में इतना अंतर क्यों?
-क्या इनमें स्कूलों के कमीशन का खेल है?
-आखिर बसों का किराया कौन तय करता है?
-बच्चों को ई रिक्शे से क्यों स्कूल भेजते हैं?
-एलपीजी से चलने वाली वैन में बच्चों को क्यों बैठाते हैं?
अभिभावक भी स्कूल वाहन चालक से लें जानकारी
सभी स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि बसों के फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र अद्यतन रखें। नियमों की अनदेखी कर संचालन करने वाले स्कूली वाहनों को सीज कर जुर्माना वसूला जाएगा। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों को जिस वाहन से भेज रहे हैं, उसकी स्थिति और दस्तावेज की जानकारी लें, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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- बृजेश, एआरटीओ बलरामपुर
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