बलरामपुर। जिले में संचालित 30 निजी नर्सिंग होम संचालकों ने लाइसेंस का नवीनीकरण अभी तक नहीं कराया है। अस्पताल में योग्य चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टॉफ, फायर एनओसी व कचरा प्रबंधन आदि की उचित व्यवस्था न होने के कारण इनके लाइसेंस का नवीनीकरण अधर में लटका हुआ है। स्वास्थ्य महकमा इनपर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
निजी अस्पताल व नर्सिंग होम संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण कराना होता है। संचालक डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टॉफ नर्स की डिग्री, भवन का नक्शा, अग्निशमन प्रमाण पत्र व बायो मेडिकल वेस्ट सहित अन्य प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करते हैं। अधिकारी इन अभिलेखों का सत्यापन कर 31 मार्च तक के लिए लाइसेंस जारी कर देते हैं। वर्ष 2022 में 66 नर्सिंग होम को लाइसेंस जारी हुआ था। 31 मार्च को इनकी वैधता समाप्त हो चुकी है। करीब डेढ़ माह बाद भी 36 संचालकों ने ही लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है।
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उतरौला के अधिकतर सेंटर अपंजीकृत
पिछले साल उतरौला में सर्वाधिक 28 नर्सिंग होम पंजीकृत हुए थे। इनमें से अब तक 18 ने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। इसी तरह बलरामपुर मेेें सात, तुलसीपुर में तीन व नगरीय क्षेत्र के दो नर्सिंग होम का लाइसेंस नवीनीकरण भी लंबित है।
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...तो क्या बिना डॉक्टर के चल रहे नर्सिंग होम
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नवीनीकरण के लिए आवेदन न आने का करण पुराने डॉक्टर व स्टाफ का नौकरी छोड़ देना अथवा अभिलेखों की कमी हो सकता है। माना जा रहा है कि संचालक के पास फायर एनओसी व बायोमेडिकल वेस्ट प्रमाण पत्र नहीं है। जिसके चलते वे लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।
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तैयार कराई जा रही सूची
लाइसेंस समाप्त होने के डेढ़ माह बाद भी बिना ऑनलाइन आवेदन के संचालित निजी नर्सिंग होम की सूची तैयार की जा रही है। संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। 31 मई तक लाइसेंस के लिए आवेदन न करने वाले नर्सिंग होम को अवैध मानते हुए बंद कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ