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केंद्रीय बजट से 25 हजार कुपोषित बच्चों को मिलेेगा लाभ

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बलरामपुर। केंद्रीय बजट से जिले के 25 हजार बच्चों को कुपोषण से मुक्त होने का लाभ मिलेगा। 66 हजार किशोरियां, गर्भवती व धात्री महिलाएं भी केंद्रीय बजट से लाभान्वित होंगी। अगले वित्तीय वर्ष में आकांक्षात्मक जिले को कुपोषण से मुक्त करने का अभियान चलाया जाएगा। जिले के 10 परियोजनाओं से जुड़े 2.63 लाख लाभार्थियों को केंद्र सरकार की इस नई योजना से फायदा होगा।
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गौरतलब हो कि सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2021-22 में आकांक्षात्मक जिलों में पोषण अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्री के बजट से जिले के आईसीडीएस विभाग से जुड़े 2,62,516 लाभार्थियों को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जिले के 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1882 केंद्रों साल्टर स्केल मशीन(बेबी वेइंग मशीन) जीरो से दो वर्ष तक बच्चों के सेहत की जांच की जा रही है। मां व बच्चे का वजन लेने वाले वयस्क वजन मशीन और बच्चों की लंबाई नापने के लिए स्टेडियामीटर मशीन भी शीघ्र ही शासन से मिलने वाली है।
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इन सभी मशीनों से बच्चों के बजन व लंबाई को लेकर मानक तैयार किया जाएगा जिसमें सैम(अति गंभीर तीव्र कुपोषित) और मैम(मध्यम तीव्र कुपोषित) होने की पहचान की जाएगी। जिले के सभी 10 परियोजनाओं के 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहले से चिन्ह्ति छह माह से तीन वर्ष तक के 1,22,860 और तीन से छह वर्ष तक के 73,630 बच्चों की जांच इन मशीनों से होगी।
जिले के सभी 10 परियोजनाओं में 9,466 किशोरियों और 56,560 गर्भवती व धात्री महिलाओं को भी लाभ मिलेगा। विशेष तौर से पोषण अभियान चलाकर इन सभी लाभार्थियों को लाभ दिलाया जाएगा।
छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को एक किलोग्राम चावल, डेढ़ किलोग्राम गेहूं, 0.75 किलोग्राम दाल, 450 ग्राम देशी घी व 400 ग्राम दूध पैकेट, तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को एक किलोग्राम चावल, डेढ़ किलोग्राम गेहूं व 400 ग्राम दूध पैकेट, 11 से 14 वर्ष तक की किशोरियों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को एक किलोग्राम चावल, दो किलोग्राम गेहूं, 0.75 किलोग्राम दाल, 450 ग्राम देशी घी व 750 ग्राम दूध पैकेट और गंभीर रुप से कुपोषित छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को डेढ़ क्रिलोग्राम चावल, ढाई किलोग्राम गेहूं, 500 ग्राम दाल, 900 ग्राम देशी घी व 750 ग्राम दूध का पैकेट हर माह दिया जाएगा।
केंद्रीय बजट से आकांक्षात्मक जिले की अन्य योजनाएं भी परवान चढ़ेंगी। एक जनपद एक उत्पाद योजना में जिले को दाल उत्पादन करने का लक्ष्य मिला है। साथ ही बिजली के क्षेत्र में भी कमियों को दूर कराया जाएगा।
मंडियों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। जिले के तीन लाख श्रमिकों को न्यूनतम वेतन योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। गैर राज्यों व जनपदों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। 75 साल से अधिक उम्र वालों को रिटर्न भरने से फुर्सत मिलेगी।
पहली बार जनगणना डिजिटल कराई जाएगी। छोटे करदाताओं के विवाद निपटारे के लिए कमेटी बनाई जाएगी। एक देश एक राशनकार्ड होने से गरीबों को कहीं के भी कोटे की दुकानों से पेट भरने के लिए राशन मिल सकेगा।
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