पांच लाख लोन और नौकरी जाने से परेशान शिक्षामित्र की मौत
-समायोजन रद्द होने के बाद सदमें में थी मृतका
अमर उजाला ब्यूरो
बलरामपुर। समायोजन निरस्त होने से परेशान एक दिव्यांग शिक्षामित्र की शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। शिक्षिका ने नौकरी की गारंटी पर बैंक से पांच का कर्जा भी लिया था। समायोजन रद्द होने के बाद से ही मृतका गहरे सदमे में थी। उसकी मौत से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है।
ग्राम धुतकहवा निवासी पप्पू यादव ने बताया कि उनकी पत्नी लीलावती-38 बीते सात शिक्षामित्र से समायोजित होकर शिक्षिका बनी थी। लीलावती प्राथमिक विद्यालय शितलापुर में तैनात थी तथा एक पैर से विकलांग थी। कुछ माह पूर्व लीलावती ने अपनी सहायक अध्यापक की नौकरी की गारंटी पर घर बनाने के लिए पांच लाख का कर्ज लिया था। गत 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद लीलावती बैंक कर्ज व परिवार की जिम्मेदारी को लेकर परेशान थी। नौकरी जाने का उन्हें गहरा सदमा लगा था। बीते दिन लीलावती को बैंक से भी कर्ज वापसी का फोन आया था। इन्हीं सब परेशानियों के चलते शुक्रवार रात लीलावती को हार्ट अटैक आ गया। परिजन गंभीर हालत में लीलावती को इलाज के बलरामपुर ले गए। परीक्षण के बाद डाक्टर ने बताया कि लीलावती की हार्ट अटैक से रास्ते में ही मौत हो चुकी है। ग्राम प्रधान अजमल ने भी बताया कि लीलावती नौकरी जाने से काफी परेशान थी। बीते कुछ दिनों से वह मेरे पास आकर अपने परेशानियों के बारे में चर्चा भी करती थी। इन्हीं सबके चलते लीलावती की हार्ट अटैक से असमय मौत हो गई। परिवार के भरण-पोषण का एक मात्र सहारा लीलावती ही थी। मृतका अपने पीछे सास, ससुर, पति व तीन मासूम बच्चियों को छोड़ गई है।