बलरामपुर। तुलसीपुर में दो शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति का मामला पकड़ में आने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जिले के 10 इंटर कॉलेजों में तैनात 15 सहायक अध्यापकों ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के फर्जी समायोजन आदेश से नौकरी हथिया ली। सत्यापन में मामला सामने आने के बाद मंगलवार को संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्य को मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
डीआईओएस गोविंद राम ने बताया कि कुछ माह पहले तुलसीपुर में दो शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी मिली थी। इस पर दोनों शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद संबंधित सत्र में जिले में तैनात अन्य सहायक अध्यापकों की भी जांच कराई गई। जांच में विभिन्न कॉलेजों में तैनात 15 सहायक अध्यापक ऐसे मिले जिनके शैक्षिक अभिलेख तो सही मिले मगर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से इनकी नियुक्ति के बाबत डीआईओएस को भेजा गया समायोजन पत्र फर्जी मिला। दरअसल, इन शिक्षकों को दिसंबर 2021 व जुलाई 2022 में समायोजन आदेश के तहत जिले में तैैनाती दी गई थी।
सत्यापन के दौरान बोर्ड से इस तरह का कोई भी पत्र जारी न करने की बात कही गई। हालांकि यह पत्र बोर्ड से डीआईओएस को रजिस्ट्री से मिला था। इस पर तत्कालीन सचिव का हस्ताक्षर भी मेल खा रहा था। बोर्ड से सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद अब संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्य को पत्र लिखा गया है। डीआईओएस ने बताया कि इन 15 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति निरस्त करके रिपोर्ट दर्ज कराने व भुगतान किए गए वेतन की रिकवरी कराने का निर्देश दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में भी 120 शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति पकड़ी जा चुकी है। 23 फरवरी को तुलसीपुर थाने में एक शिक्षिका के खिलाफ 693 दिन बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। अब इस मामले की जांच पुलिस कर रही है।