बलरामपुर। बाढ़, सूखा व भूकंप जैसी आपदाओं से लोगों को बचाने के लिए अब गांव-गांव जागरूकता की मुहिम चलाई जाएगी। इसके लिए जिले में गठित 10,968 स्वयं सहायता समूहों की 1.42 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में बृहस्पतिवार को गोंडा में बलरामपुर की 75 स्वयं सहायता समूह की प्रमुखों को आपदा प्रबंधन के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।
दरअसल, हिमालय की तलहटी में बसे बलरामपुर में बाढ़, सूखा व अन्य आपदाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। जुलाई से अगस्त तक बाढ़ का संकट यहां के लोगों को झेलना पड़ा। ऐसे में बाढ़ व अन्य आपदाओं के असर को कम करने के लिए अब लोगों को जागरूक करने की पहल शुरू की गई है।
आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह का कहना है कि इसका मकसद है आपदा के प्रभाव को कम करना है। आपदा प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका अहम होती है। आपदा प्रबंधन में महिलाओं की सहभागिता का दूरगामी परिणाम होगा। विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अग्निकांड, सर्पदंश, ग्लोबल वार्मिंग, सुनामी के अलावा मानव जनित आपदाओं से कैसे बचाव करना है, इसके लिए समुदाय का प्रशिक्षित होना आवश्यक है। ऐसे में यह प्रयास किया जा रहा है। पहले चरण में 75 स्वयं सहायता समूह की प्रमुखों को प्रशिक्षित किया गया है, इसके बाद जिला व ब्लॉक स्तर पर कार्यशाला होगी।
उपायुक्त स्वत: रोजगार मंजू त्रिवेदी ने बताया कि जिले में कुल 10,968 स्वयं सहायता समूहों में 1.42 लाख महिलाएं हैं। इस पहल से आपदा के प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।