बलरामपुर। जिला महिला अस्पताल के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में बीते छह माह में 106 मासूमों की जान चली गई। अप्रैल से अक्तूबर तक बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के आंकड़े देख सोमवार को कॉमन रिव्यू मिशन के तहत पहुंचीं केंद्रीय टीम के सदस्य हैरान रह गए।
निरीक्षण के दौरान एनएचएम की सलाहकार मोतुसी देबनाथ ने जब एसएनसीयू वार्ड में भर्ती हुए नवजातों की मौत का कारण पूछा तो चिकित्सक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। सीएमएस डॉ. सुमन दत्त गौतम और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश वर्मा से पूछा गया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत कैसे हुई, क्या उपचार में कमी रही या देखरेख में लापरवाही हुई। इस पर दोनों ने चुप्पी साध ली। केंद्रीय टीम ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि जिस वार्ड का उद्देश्य नवजातों को जीवन देना है, वहां लगातार मौत होना बेहद गंभीर संकेत हैं।
दोनों केंद्रीय टीमों में एनसीडीसी की संयुक्त निदेशक डॉ. सिम्मी तिवारी, एनएचएम की सलाहकार मोतुसी देबनाथ, एनएचएम के वित्त नियंत्रक डॉ. सुमंता कर, डॉ. विनीत कुमार पाठक और राजीव मोहन पांडेय शामिल रहे। दूसरी टीम में डिप्टी डीजी सेंट्रल टीबी डिविजन डॉ. रघुराम राव, वरिष्ठ सलाहकार नसरैन खान, गुणवत्ता सलाहकार डॉ. रणबीर सिंह और डॉ. सुरभि यादव शामिल थीं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेश कुमार चतुर्वेदी, एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव और डॉ. रुचि पांडेय आदि मौजूद रहे।
संक्रमण नियंत्रण के मानक भी पूरे नहीं
जांच में टीम को एसएनसीयू में कई खामियां नजर आईं। कई उपकरणों की नियमित जांच नहीं की गई थी, कुछ मशीनें खराब पाई गईं। वहीं संक्रमण नियंत्रण के मानक भी पूरे नहीं थे। टीम ने सवाल किया कि अप्रैल में जब नौ नवजातों की मौत हुई थी, तभी सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए। मई में 11, जून में 15, जुलाई में 26, जबकि अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में 15-15 नवजातों की मौत दर्ज की गईं। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब इतने गंभीर आंकड़ों के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
संयुक्त अस्पताल में मिले गंदी चादर और कंबल
निरीक्षण के दौरान महिला अस्पताल के बाद संयुक्त जिला अस्पताल का भी जायजा लिया गया। यहां भी गंदगी और अव्यवस्था ने टीम को नाराज कर दिया। वार्डों में गंदी चादर और कंबल मिले। ओपीडी रजिस्टर मानक के अनुरूप नहीं पाया गया, दवा भंडार की व्यवस्था भी अव्यवस्थित थी। एनसीडीसी की संयुक्त निदेशक डॉ. सिम्मी तिवारी ने अस्पताल प्रशासन को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। एनएचएम के वित्त नियंत्रक डॉ. सुमंता कर ने बजट के खर्च से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की, वहीं डॉ. सिम्मी तिवारी ने दवा भंडार की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली।
श्रावस्ती में की समीक्षा बैठक
निरीक्षण के बाद दोनों टीमों ने श्रावस्ती जनपद के एक होटल में जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक मैराथन बैठक की। इसमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, टीबी खोजो अभियान और आयुष्मान भारत योजना सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। टीम ने सवाल उठाया कि जब योजनाओं पर भारी खर्च हो रहा है, तो जमीन पर उसका असर क्यों नहीं दिख रहा। केंद्रीय टीम ने स्पष्ट कहा कि अब सिर्फ रिपोर्ट या सफाई नहीं, बल्कि ठोस सुधार की जरूरत है।