बलरामपुर के महराजगंज तराई बाजार में भरा बाढ़ का पानी।
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बलरामपुर। जिले के डेढ़ लाख लोगों पर पहली बारिश का कहर टूट पड़ा है। पहाड़ी नालों के बाढ़ सौ से अधिक गांवों पर कहर बरपा रही है। कई पहाड़ी नाले उफान पर हैं। पहाड़ी नालों के बाढ़ का पानी सड़कों के साथ घरों में भी कहर बनकर टूट रहा है।
कई गांवों के लोगों का जिला, तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों से संपर्क कट चुका है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। बाढ़ से निपटने की प्रशासनिक तैयारियां कागजों में सिमट कर रह गई हैं। प्रशासन की तरफ से लोगों ने कोई मदद न मिलने का आरोप लगाया है। पहली बरसात में ही हर तरफ बर्बादी दिखाई पड़ने लगी है। डीएम का फरमान भी बाढ़ खंड के अफसरों पर नहीं हुआ है। बाढ़ आने पर तटबंधों और बांधों का हाल भी बेहाल हो गया है।
बाढ़ प्रभावित पीड़ितों का आरोप है कि बरसात से पहले प्रशासन की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया इसी के चलते पहाड़ी नालों के बाढ़ का पानी सौ से अधिक गांवों में कहर बरपा रहा है। पहाड़ी नालों के बाढ़ में डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
कोड़री-ललिया, गौरा चौराहा-तुलसीपुर और ललिया-महराजगंज तराई सहित कई प्रमुख मार्गों पर पहाड़ी नालों के बाढ़ से आवागमन ठप हो गया है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। गत वर्ष बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में पंचायत निधि से खरीदी गई नावें भी बाढ़ पीड़ितों का सहारा नहीं बन पा रहीं हैं। नावों के खरीदारी में मानक व गुणवत्ता की अनदेखी की गई जो पानी में उतरते ही स्वयं डूबने लगती हैं।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि जिले में बाढ़ से प्रभावित गांवों व शहरों को बचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संबंधित विभागों के अफसरों को जर्जर तटबंधों व बांधों पर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सभी अफसरों व कर्मियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है। एसडीआरफ की टीमें भी बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगाई गई हैं। राहत कार्य में लापरवाही बरतने वाले अफसरों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।