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Ballia News: बिना अचारण शुद्ध किए चरण की पूजा असंभव

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दया छपरा। जब तक आचरण शुद्ध नहीं होगा, तब तक चरण की पूजा नहीं हो सकती। आप बड़ा तभी हो सकते हैं, जब आपको छोटे का स्नेह प्राप्त हो। छोटे का स्नेह तभी मिलेगा जब आप छोटे को स्नेहाशीष देंगे। उक्त बातें ग्राम पंचायत जगदेवा के मिश्र गिरि के मठिया पर आयोजित नव दिवसीय नवाह परायण यज्ञ में प्रवचन करते हुए मोहन शुक्ला जी महाराज ने कही। बताया कि यदि कोई भार की कोई वस्तु है तो ढोने वाले के लिए है। यदि कोई मार्ग है तो वह चलने वाले के लिए है। मोटापा भी उसी का है, वह सब शरीर के लिए कहा जाता है। आत्मा के लिए नहीं। जनकपुर में गुरु के आज्ञा लेकर जब जनकपुर का दर्शन करने लखन के साथ गए तो पहले ही लखन से कहे कि नजरे झुका कर चलो। यही नहीं कहीं भी अपने गुरु के आज्ञा के बिना नहीं गए। कथा देर रात तक चलती रही जहां श्रद्धालु नर नारी कथा रूपी सागर में गोता लगाते रहे।
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