भगवान की कथा की तरह भक्तमान की कथा भी अनादि और अनंत है। ब्रह्मभाव, अभिव्यक्ति एवं आराधना के सिर पर सवार होकर भक्ति की महागाथा को परिभाषित करता है।
मूलत: भक्त ही भगवान के अवतरण के मुख्य कारक रहे हैं। आज पूरी दुनिया भक्ति मार्ग से विमुख होकर जीवन संघर्ष को दुरूह बना रही है। जरूरत है मानवजाति की अपनी प्राचीन तथा अमूल्य परंपरा का निर्वहन कर अध्यात्मिक शिव साधन की दिव्य ज्योति जलाने की।
यह उद्गार नगर के टाउन हाल बापू भवन मैदान में श्रीभक्तमान कथा एवं संकीर्तन के अवसर पर सोमवार को पूज्य संत चित्र-विचित्र महाराज ने व्यक्त किया।
कहा कि रामायण एवं रामकथा से भरत, लखनलाल, हनुमान, सबरी तथा जटायू का प्रसंग हटा दिया जाय तो भगवान की कथा अपूर्ण ही रहेगी। कहा मानव हृदय में जब तक भक्ति प्रादुर्भाव नहीं होगा।
तबतक अनुपम एवं अनुकरणीय भक्त श्रृंखला का साथ नहीं मिलेगा। कथा आरंभ के पूर्व टाउन हाल मैदान में श्री चित्र-विचित्र जी महाराज के पांव पड़ते ही पंडाल रस से सराबोर हो गया।
लगा स्वर्ग की सुनहरी मानो धरा धाम पर भक्त माल की कथा का बखान करने को तत्पर हो बैठी है। इसके पूर्व कतारबद्ध भक्ति रस से परिपूर्ण महिलाओं ने कलश सिर पर रखकर कथा मर्मज्ञ का अभिनंदन एवं स्वागत किया।
बाद में व्यास गद्दी की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा प्रार्थना शुरू की गई तथा भक्तमान की कथा सुनने को लीन हो गए। इस मौके पर नगर सहित ग्रामीण इलाकों से आई सैकड़ों श्रद्धालु नर-नारियों ने भक्तमान की कथा का श्रवण किया।