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हुनर के दम पर महिलाएं चला रहीं घर गृहस्थी

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बैरिया। लॉकडाउन के कारण शहरों में मजदूरों का जब कोई सहारा नहीं रह गया तब किसी तरह यह मजदूर पूरे परिवार के साथ गांव पहुंचे। लेकिन गांव पर भी इन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है जिसके चलते आर्थिक आमदनी प्रभावित हो गई। ऐसे में इनके घर की महिलाओं ने अपनी हुनर के दम पर घर गृहस्थी चलाने का काम शुरु कर दिया।
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देश में कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रवासी शहर जाना नहीं चाहते हैं लेकिन काम न मिलने से उनका भी धैर्य टूट रहा है। हुनरमंद पत्नियां कह रही हैं कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाता तब तक सिलाई, कढाई, बुनाई के बल पर कुछ पैसे कमाकर घर चल रहा है। लेकिन बच्चों को पढ़ाना है, बच्चियों की शादी विवाह के लिए पैसे जुटाना है तो इन्हें शहर तो जाना ही पड़ेगा।
हरियाणा राज्य के पानीपत से आई बैरिया ब्लॉक के श्रीनगर निवासिनी सावित्री देवी ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व मेरे पति राजकुमार वर्मा की मौत हो गई। इसके बाद मैं अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पानीपत पहुंची और एक कपड़ा सिलाई की फैक्ट्री में काम करने लगी। बच्चे बड़े हुए और वह भी काम धंधा करने लगे। अब घर गृहस्थी ठीक से चल रही थी। इसी बीच लॉकडाउन से काम के साथ आय भी बन्द हो गया और भोजन पर भी आफत आ गई। किसी तरह हम लोग गांव पहुंचे और गांव पर ही सिलाई का काम शुरू कर दी हूं, जिससे घर गृहस्थी चल रही है।
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दुर्जनपुर निवासिनी रूपा तिवारी ने बताया कि पति जयप्रकाश तिवारी दिल्ली स्थित एक कम्पनी में नौकरी करते थे। लॉकडाउन के वजह से कम्पनी बन्द हो गई और हम लोग गांव पहुंच गए। गांव पर घर गृहस्थी कैसे चलेगा इसको लेकर जटिल समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन मैंने अपने पति व सास मां के कहने पर अपने हुनर का प्रयोग शुरु कर दिया और सिलाई का काम शुरू कर दी। अब इसकी कमाई से घर गृहस्थी चल रहा है।
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