बलिया। उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब गांवों में पोषण वाटिकाओं की स्थापना कराएंगी। इसके लिए आजीविका सखियों ने समूहों की महिलाओं को गांवों में जाकर प्रशिक्षण देकर पारंगत करना शुरू कर दिया है।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का है। इसके लिए सरकार की ओर से बहुआयामी कदम उठाए जा रहे हैं। ग्राम स्तर पर मिशन के तहत महिलाओं के समूह में कम से कम 12 महिलाओं को शामिल किया जा रहा है। अब मिशन की ओर से समूहों की महिलाओं को खेती-बाड़ी से जोड़ने के लिए आजीविका सखियों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ब्लॉक में सौ आईसीआरपी (इंटरनल कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के पदों पर महिलाओं का चयन किया जा रहा है। चयनित आईसीआइपी की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
आजीविका सखी का चयन कम से कम सात और अधिक से अधिक 14 महिला समूह को मिलाकर होता है। आजीविका सखियों का दायित्व समूहों की महिलाओं को खेती बाड़ी के कार्य के लिए पारंगत करना है। आईसीआरपी का कार्य अपने जनपद के विभिन्न ब्लॉकों या सरकार के आदेश पर प्रदेश के गैर जनपदों में जाकर महिलाओं के समूहों का गठन कर उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में बता आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करना है।
उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उन्हें खेती-बाड़ी से जोड़ने का कार्य चल रहा है। पोषण वाटिका की स्थापना उसी का हिस्सा है। - डीएन पांडेय, डीसी, एनआरएलएम
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