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महिलाओं को कमजोर आंकते, इसलिए टिकट से हैं भागते

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बलिया। जनपद में विधानसभा चुनाव छठे चरण में तीन मार्च को होना है। सभी राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते खोल सिपहसालारों को मैदान में उतार दिया है। महिला सशक्तीकरण का दम तो सभी राजनीतिक दल ठोकते हैं, लेकिन चुनाव में महिलाओं पर दांव लगाने में दलों के पसीने छूट रहे हैं। जनपद की सात विधानसभा सीटों में भाजपा और बसपा ने मात्र एक महिला उम्मीदवार पर दांव लगाया है। कांग्रेस के सात प्रत्याशियों में सर्वाधिक तीन महिला उम्मीदवार हैं। वहीं सपा पांच सीटों पर और उसकी सहयोगी सुभासपा दो सीटों पर लड़ रही है, लेकिन एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतार पाई है।
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आधुनिकता के इस दौर में हर क्षेत्र में महिलाएं, पुरुषों के साथ कदमताल कर रही हैं, लेकिन जिले में अब तक आधी आबादी को उस हिसाब से राजनीतिक भागीदारी हासिल नहीं हुई, जिसकी वह हकदार है। केंद्र से लगायत प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकारों की ओर से महिला उत्थान को लेकर तमाम योजनाएं और दावे किए जाते रहे हैं। इसके बाद भी सियासी समीकरण बनाने और बिगाड़ने में अहम रही महिलाओं की बात करें तो जनपद अब तक सिर्फ दो महिलाएं ही विधानसभा का सफर तय कर सकीं हैं। लोकसभा या राज्यसभा में अभी तक इनका खाता भी नहीं खुला है। चुनावों में टिकट के मामले में इनकी भागीदारी पर सभी दल बातें तो बड़ी करते हैं, लेकिन टिकट देने के वक्त सभी बातें हवा-हवाई हो जातीं हैं। सभी प्रमुख दल आधी आबादी को कमजोर आंकते हुए इनको टिकट देने से कतराते हैं।
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महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस सबसे आगे
बलिया। जनपद में भाजपा निषाद पार्टी से गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरी है। छह सीटों पर भाजपा ने सीधे प्रत्याशी घोषित किए हैं, एक सीट बांसडीह निषाद पार्टी को गई है। भाजपा नेत्री केतकी सिंह निषाद पार्टी से प्रत्याशी है, लेकिन भाजपा के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि भाजपा से एक महिला प्रत्याशी है। इसी सीट से बसपा ने मानती राजभर को प्रत्याशी बनाया है। वो सुभासपा छोड़ बसपा में आई हैं। महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस सबसे आगे हैं। कांग्रेस ने रसड़ा से डॉ. ओमलता, बैरिया से सोना बिंद, बेल्थरारोड से गीता गोयल को प्रत्याशी बनाया है। सुभासपा से गठबंधन कर मैदान में उतरी समाजवादी पार्टी महिलाओं को टिकट देने का साहस नहीं जुटा पाई है। ऐसा नहीं है की पार्टी से महिलाओं की दावेदारी नहीं है, लेकिन कोई टिकट पाने में सफल नहीं हुई। पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही सपा और दो सीटों पर चुनाव लड़ रही सुभासपा से कोई महिला प्रत्याशी नहीं है।
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दो महिलाएं बन चुकी हैं विधायक
बलिया। महिलाओं को चुनाव लड़ाने पर हर पार्टी पीछे नजर आती हैं। यहीं कारण है कि अब तक हुए विधानसभा चुनाव में जिले की दो महिलाएं ही विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहीं। 80 के दशक में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में तब के कद्दावर कांग्रेस नेता बच्चा पाठक को शिकस्त देकर विजयलक्ष्मी दो बार विधायक बनी थीं। इसी प्रकार 1996 के उपचुनाव में निर्दल और साल 2007 में बलिया नगर विधानसभा से मंजू सिंह बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंची थीं।
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महिला मतदाताओं की स्थिति
विधानसभा कुल मतदाता महिला मतदाता
बेल्थरारोड 353776 161919
रसड़ा 354332 160982
सिंकदरपुर 300777 137383
फेफना 326142 149396
बलिया नगर 367671 165117
बांसडीह 403813 185902
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