बलिया। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए गंगा यात्रा निकाली जा रही है लेकिन सवाल उठता है कि क्या इससे गंगा निर्मल हो जाएंगी। 13 वर्ष पहले शुरू हुआ सीवर निर्माण का कार्य पूरा हो गया होता तो शायद गंगा काफी हद तक निर्मल हो जाती लेकिन यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। गंगा कब स्वच्छ होगी, इसका जवाब प्रशासन और शासन के पास नहीं है।
वर्ष 2006-07 में सीवर योजना की शुरुआत कुल 97.22 करोड़ की धनराशि से हुई। इससे सीवर व एसटीपी का निर्माण होना था लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इस कार्य के लिए पहले कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया। इसके बाद जल निगम ने इस कार्य का ठेका ज्योति बिल्ड टेक लखनऊ को दे दिया और काम को अधिकतम तीन सालों में पूरा करने का अनुबंध किया गया। लेकिन 13 साल बाद भी सीवर का निर्माण अधर में लटका हुआ है। डेढ़ माह पहले तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण में सीवर निर्माण में खामियां पाईं थीं। पांच माह पहले भी तत्कालीन डीएम ने सीवर निर्माण से संबंधित पत्रावलियों की जांच की थी। डीएम ने मिड्ढी चौराहे से काजीपुरा तक पैदल भ्रमण किया था। इस मार्ग में 300 मीटर तक पाईप नहीं डालने की बात कही गई। जिलाधिकारी ने इसका कारण पूछा तो इसका जवाब जल निगम के किसी अधिकारी के पास नहीं था।उस दौरान तत्कालीन एक्सईएन ने बताया था कि मेसर्स ज्योति बिल्ड टेक प्रा.लि. की ओर से दी गई बैंक गारंटी नकली है और 30 लाख के बैंक गारंटी को तीन करोड़ छह लाख 76 हजार एक सौ किया गया है। इसके अलावा तत्कालीन एक्सईएन की ओर से 31 जुलाई 19 को मेसर्स ज्योति बिल्ड टेक प्राइवेट लिमिटेड को समय वृद्धि एवं बैंक गारंटी के संबंध में पत्र जारी कर बताया कि उनकी ओर से अभी तक विभाग में समय बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया है, जबकि अधीक्षण अभियंता आजमगढ़ ने जुलाई 19 तक समय बढ़ाया है। इतना कुछ होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों की ओर से संबंधित कंपनी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थिति यह है कि गंगा में नालों का पानी गिर रहा है।
कंपनी पर झारखंड सरकार कर चुकी है कार्रवाई
जल निगम ने जिस ज्योति बिल्ड टेक कंपनी को ठेका दिया है उसे इसी तरह का कार्य पूरा नहीं करने के कारण झारखण्ड सरकार ने बैंक गारंटी जब्त करते हुए कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2014 में झारखंड राज्य के रांची नगर निगम में 359 करोड़ से बनने वाले ड्रेनेज निर्माण का ठेका लिया था। इस काम को दो सालों में पूरा करना था लेकिन चार साल बाद भी काम पूरा नहीं होने पर कंपनी की ओर से दी गई 10 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त करते हुए कार्रवाई की।
--
सर्वे टीम बुलाने का निर्देश भी हवाहवाई
बलिया। जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों से कहा कि एक सप्ताह के अंदर जीपीआर (ग्राउंड पेनेटरेटिंग रडार) सिस्टम की टीम भी मंगाने का जीपीआर सर्वे के जरिए बिना खुदाई किए पाइप लाइन कहां बिछी है और कहां नहीं, इसको आसानी से देखा जा सकता है। कोशिश करें कि खुदाई टीम के साथ जीपीआर सर्वे की भी टीम आ जाए। लेकिन यह निर्देश भी हवाहवाई ही साबित हुआ।
सीवर परियोजना में हुई गड़बड़ी का पता लगाया जा रहा है। विभागीय मुख्यालय को न सिर्फ पत्र लिखा गया, बल्कि अब तक कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। मामला मुख्यालय से लटका है। बातचीत के आधार पर यह तय है कि जब भी काम दोबारा शुरू होगा, उसके छह माह में पूरा कराकर सीवर चालू करा दिया जाएगा।-श्रीहरि प्रताप शाही, जिलाधिकारी
-