फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शासन ने मांगा संपत्ति का ब्योरा तो बाबुओं में मची खलबली

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। शासन से संपत्ति का ब्यौरा मांगे जाने के बाद शिक्षा विभाग के कई बाबुओं में खलबली मच गई है। संपत्ति का ब्यौरा आनलाइन करने का आदेश मिलने के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक ही पटल पर वर्षों से जमे मोटी कमाई करने वाले बाबुओं के चेहरे की रौनक गायब हो गई है। कई बाबुओं ने इस छोटी सी नौकरी में ही शहर में आलीशान बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर ली हैं। कई जगहों पर उनकी जमीनें भी हैं। शासन के आदेश के बाद अब वह बचाव का रास्ता खोज रहे हैं।
विज्ञापन

बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बाबुओं से संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया है। एक ही पटल पर दस-दस वर्षों से जमे बाबुओं ने विभाग पर पूरी तरह कब्जा कर रखा है। हर काम के लिए रुपये का मानक निर्धारित कर रखा है। दोनों विभागों में किसी भी काम के लिए पहुंचने वाले लोगों को इनकी परिक्रमा करनी पड़ती है। अगर कोई व्यक्ति सीधे अफसर से मिलकर अपनी बात रखता है, तो ये बाबू अफसरों को कागजों के हेर फेर में ऐसे उलझा देते हैं कि वे भी उनकी हर बात मानने को विवश हो जाते हैं। शिक्षकों की संबद्धता, एरियर भुगतान मृतक आश्रित नियुक्ति, स्कूलों की मान्यता परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में अफसरों का हवाला देकर मोटी कमाई की जाती है। वर्षों से जमे इन बाबुओं के कागजी कीड़ा होने से अफसर भी इनकी कमी नहीं पकड़ पाते हैं। इन बाबुओं के लिए शासन का नया फरमान परेशानी का सबब बन गया है। हालांकि अधिकांश बाबुओं ने अपने बचाव का रास्ता पहले से ही खोज निकाला है। उन्होंने बैंक बैलेंस के साथ ही आशियाना भी घर के किसी और सदस्य या फिर रिश्तेदारों के नाम कर रखा है। डीआईओएस डॉ. ब्रजेश मिश्रा और बीएसए शिव नारायन सिंह ने बताया कि शासन ने बाबुओं की संपत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
हर वर्ष आता है आदेश, नहीं बदलता पटल
शासन हर वर्ष बाबुओं का पटल परिवर्तित करने का निर्देश देता है और अधिकारी 20 प्रतिशत के मानक को पूरा करने लिए दूसरे कर्मचारियों की पटल बदल देते हैं मगर कमाई करने वाले बाबुओं को नहीं छेड़ते हैं। दरअसल, इन बाबुओं के माध्यम से अधिकारी भी अपनी जेब भरते हैं। इसलिए उनकी हां में हां मिलाने के लिए मजबूर होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें