पहली जुलाई को जिले के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूल खुल गए। इस सत्र में स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए मस्ती भरा रहा। मासूमों के स्कूल जाने के चलते सड़कों पर भी स्कूली वाहनों की भीड़ रही। लोग लाडलों को स्कूल छोड़ने व स्कूल से वापस लाने के लिए सड़क पर घंटों इंतजार करते रहे।
स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए मस्ती भरा रहा तो अध्यापकों और अभिभावकों के लिए जिम्मेदारियों भरा। सुबह बच्चे स्कूल जाने के लिए उत्साहित थे और जल्दी-जल्दी तैयार होकर स्कूल की ओर चल पड़े। स्कूल पहुंचते ही अपने ईष्ट मित्रों को ढूंढा और छुट्टियों की मस्ती को साझा किया।
किसी ने रिश्तेदारों के यहां की बात शुरू की तो किसी ने अन्यत्र जगहों पर घूमने की। पहले दिन शिक्षकों ने भी बच्चों को छूट दे रखा था। उधर अभिभावक सुबह ही बच्चों को तैयार करने में जुट गए। इसके बाद स्कूल तक जाकर छोड़ा या स्कूल वाहनों में बैठाया। शिक्षक भी नए सत्र की तैयारियों में जुटे रहे और नए पाठ्यक्रमों की बच्चों को जानकारी दी।