गंगा के ऊफान के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया, ऐसे में बरात को टालना या रद्द करना मुश्किल था। इस विषम परिस्थिति में परिवार ने नाव से बरात ले जाने का फैसला किया। जब गांव के लोगों ने पहली बार एक अद्भुत नजारा देखा।
गंगौली गांव के पास तटबंध के नीचे से एक सजी-धजी नाव पर बरात निकल रही थी। दूल्हा साफा पहने, पारंपरिक पोशाक में नाव पर बैठा था और उसके साथ बराती भी उसी जोश के साथ मौजूद थे। नाव पर कोई डीजे नहीं था, न ही बैंड-बाजा, लेकिन गंगा की लहरों की थपकी और नाविकों की ताल ने माहौल को खास बना दिया।
बरातियों ने भी पूरे जोश में ढोलक की जगह तालियों और गुनगुनाहट के साथ उत्सव मनया। ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अनोखा और हैरतअंगेज था। लोगों ने अपने मोबाइल से इस खास बारात की फोटो और वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।
देखते ही देखते यह बारात इलाके में चर्चा का विषय बन गई। दूल्हे के पिता कमलेश राम ने बताया कि शादी की तारीख पहले से तय थी और रद्द करना हमारे लिए संभव नहीं था। इसलिए हमने नाव से बारात ले जाने का निर्णय लिया। गंगा मैया की लहरों ने हमारी बारात को यादगार बना दिया। यह शादी हमारे परिवार के लिए हमेशा खास रहेगी।