बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ की ओर से सोमवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय के शिक्षा दर्शन विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। पुनरुत्थान विद्यापीठ अहमदाबाद की कुलपति प्रो. इंदुमती काटडरे ने कहा कि पश्चिमी चिंतन परंपरा मूलत: भौतिकतावादी है। वर्तमान शिक्षा पद्धति भारतीय नहीं है, बल्कि पश्चिमी है, जो भारतीय चिंतन के विपरीत है।
कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि हमें श्रम के महत्त्व को स्वीकारना होगा, तभी हम वास्तविक रूप से भारतीय होंगे। इसमें प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. विनोद मिश्र, डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी, डॉ. गणेश पाठक, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. अरविंद नेत्र पांडेय, डॉ. साहेब दूबे आदि के अलावा शोधार्थी एवं विद्यार्थी जुड़े रहे। अतिथियों का परिचय डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय, बीज वक्तव्य डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. जैनेंद्र कुमार पांडेय ने किया।