स्वास्थ्य विभाग ने सीएम पोर्टल की शिकायत को संज्ञान ले सीएमओ कार्यालय के बगल में चल रहे अवैध नर्सिंग होम को सील कर दिया। इसे सरकारी अस्पताल में संविदा पर तैनात डॉक्टर दंपति चला रहे थे। अभी भी ऐसे कई अस्पताल हैं, जो बिना पंजीकरण व एनओसी के चल रहे हैं। इन अस्पतालों में अप्रशिक्षित चिकित्सक व कर्मचारी मरीजों का इलाज कर उनके जान के दुश्मन बने हैं। विभाग का संरक्षण कहे या लापरवाही सबकुछ जानने के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से शहर से लेकर गांव के चट्टी चौराहे पर अवैध नर्सिंग होम, क्लीनिकों का मकड़जाल फैला हुआ है। मरीजों को कम पैसों में बेहतर इलाज का लालच देकर ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले लोगों को बातों में फंसा कर दलालों के माध्यम से अपने अस्पताल में भर्ती करा मरीजों को गंभीर बीमारी बता शोषण करते हैं। इलाज के दौरान मरीज की मौत होने अस्पताल का नाम वह जगह बदलकर बड़े आसानी से विभागीय कार्यवाही से बच निकलते हैं। सीएमओ कार्यालय में करीब 75 निजी अस्पताल पंजीकृत है। धरातल पर इससे तीन से चार गुना अधिक अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। विभाग सूत्रों की माने तो इन अवैध अस्पताल संचालकों की विभाग व राजनैतिक में अच्छी खासी पकड़ होने के कारण इनका कोई कुछ नहीं कर सका।