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...कहीं पूरे परिवार के खात्मे का प्लान तो नहीं था?

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हल्दी। श्याम बिहारी ने अचानक भाई के परिवार पर जिस तरह से हमला किया, उसे लेकर सभी लोग भौचक हैं। किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर उसने इतना खतरनाक कदम क्यों उठाया? 16 माह के भतीजे पर उसके वार करने के तरीके से सभी लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि हो सकता है उसने एक साथ पूरे परिवार को ही खत्म करने का प्लान बनाया हो, लेकिन रासबिहारी की तीन बेटियां और एक बेटा घर में नहीं होने के कारण उसके प्रकोप से बच गए। अपनी जानकारी में तो उसने भतीजे के साथ भाई व भाभी को भी मार ही डाला था, लेकिन उनकी जान बची हुई है और वे जिला अस्पताल में जीवनमृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
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गांव में इस वक्त सिर्फ रासबिहारी और श्यामबिहारी के पिता विशुनदेव साहनी मौजूद हैं और वे कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं। उनकी हालत पागलों जैैसी हो गई थी, क्योंकि उनका एक बेटा हत्यारा बन फरार है तो दूसरा पत्नी के साथ मृत्यु शैया के करीब है। उधर, पोते की मौत हो चुकी है। आखिर श्यामबिहारी पर ये जुनून क्यों सवार हुआ इसका जवाब उनके पास भी नहीं था। उधर, रासबिहारी और उनकी पत्नी प्रभावती इस स्थिति में नहीं कि वे कुछ बता सकें। चाचा के कहर से बच्चे चारों बच्चे भी इस स्थिति में नहीं थे कि वे कुछ बता सकें। अब तो इस मामले से पर्दा तभी उठ सकता है जब या तो श्याम बिहारी पकड़ा जाए या रासबिहारी या उसकी पत्नी में से किसी को होश आए ेतो वह कोई बयान दे सकें।
उधर, गांव वालों की स्थिति ये थी कि वे समझ ही नहीं पा रहे थे आखिर अचानक ये क्या हो गया है। गांव वालों की मानें तो जब श्याम बिहारी गांव में आया था और कोरोना को लेकर उसका विरोध हुआ था तो रासबिहारी उसकी ढाल बन गया था। उसने न सिर्फ भाई को अपने साथ दियारे में रखा, बल्कि नाश्ते के साथ भोजन आदि तक की व्यवस्था भी की। लेकिन नतीजे में भाई ने उसके साथ ऐसा कर दिया कि अब कोई भी कुछ कहने की ही स्थिति में नहीं है। गांव वालों की मानें तो श्याम अक्सर दियारे में गंगा नदी के उस पार स्थित अपनी ससुराल नैनीजोरा भी जाता रहता था। हालांकि दोनों परिवारों में संपत्ति आदि को लेकर भी कभी कोई विवाद अभी सामने नहीं आया था। वारदात के वक्त भी श्याम बिहारी की पत्नी व बच्चे नैनीजोर में ही थे।
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घर पर नहीं थे, इसलिए चाचा से बच गए
हल्दी। मृतक अभय की तीन बहनें आरती, भारती व अर्चना और एक भाई अमन भी हैं। श्याम बिहारी अपने भाई को धराशायी कर दौड़ते हुए घर में घुसा तो उसने सामने पड़े अभय को देखते ही उस पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया। वह चिल्लाया तो उसकी आवाज सुनकर मां प्रभावती बचाने के लिए दौड़ी। तभी श्याम बिहारी ने उस पर चाकू का प्रहार शुरू कर दिया। बताया तो यहां तक जा रहा है कि श्याम बिहारी ने पूरे घर में अन्य बच्चों की भी तलाश की, लेकिन वे हादसे से थोड़ी देर पहले ही घर से निकल कर पड़ोस के घर में चले गए थे, इसलिए चाचा के कहर से बच गए। गांव वालों ने बताया कि श्याम बिहारी ने जिस तरह से आज घटना को अंजाम दिया, उससे यही लग रहा है कि उसने इसकी पूरी प्लानिंग कर रखी थी, क्योंकि उसने हाथ में जो चाकू पकड़ रखा था, उसमें दोनों तरफ धार थी और वह बिना कुछ भी सोचे विचारे लगातार बस वार किए जा रहा था।
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