रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्डब्वाय से गाली-गलौज और दुर्व्यवहार करने के विरोध में डाक्टरों और कर्मचरियों ने बुधवार की रात इमरजेंसी ठप कर दी और गुरुवार की सुबह धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि जबतक रसड़ा कोतवाल पीके मिश्रा को हटाया नहीं जाएगा तबतक हड़ताल जारी रहेगी।
इसकी सूचना पर पहुंचे रसड़ा सीओ रामकृष्ण मिश्र ने मुख्य चिकित्साधिकारी डा. पीके सिंह तथा एसपी से फोन पर बात की। एसपी के 48 घंटे के अंदर मांग पूरा करने का आश्वासन पर तीन घंटे बाद डाक्टर और कर्मचारी काम पर वापस लौटे। इधर इस वजह से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आरोप है कि बुधवार की रात अठिलापुरा में सांड़ के हमले में घायल वृद्ध की मौत की मेमो लेकर वार्डब्वाय अभिनव कुमार सिंह कोतवाली पहुंचा था। कोतवाल ने मेमो देखते ही कहा कि मरीज को क्यों नहीं बलिया भेज दिए, यहां क्यों रखे हो।
इसपर वार्डब्वाय ने बताया कि व्यक्ति की मौत यहां हुई है, तो हम शव बलिया कैसे भेज सकते है ? इतना सुनते ही कोतवाल ने वार्डब्वाय को गालियां देने लगे और धक्का मारकर थाने से भगा दिया। इधर वार्डब्वाय ने इसकी जानकारी चिकित्सक एवं कर्मचारियों को दी, तो वह आग बबूला हो गए।
उन्होंने तत्काल सीएमओ से बात कर इमरजेंसी को ठप कर दिया। रात में सूचना पर पहुंचे सीओ और नायब तहसीलदार ने किसी तरह चिकित्सक और कर्मचारियों को मनाया। इसके बाद इमरजेंसी बहाल हुई। गुरुवार की सुबह चिकित्सकों और कर्मचारियों ने ओपीडी बंद कर दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में नाराज डाक्टरों और कर्मचारियों ने धरना सभा की। डा. प्रेमचंद्र भारती ने कहा कि रसड़ा कोतवाल आए दिन चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते रहते हैं। बाद में पुलिस अधीक्षक ने फोन पर बात कर 48 घंटे के अंदर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब चिकित्सक और कर्मचारी काम पर वापस लौटे।
साथ ही चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे में कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उधर हड़ताल की वजह से मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंभीर हालत वाले रोगियों ने मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल का सहारा लिया जबकि सामान्य मरीजों ने घर लौटने में ही भलाई समझी।