वक्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही अवकाश प्राप्त शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम् देकर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में महाविद्यालय के प्रबंधक सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि 1857 के क्रांति के महानायक बाबू कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया। उनके त्याग, बलिदान की गाथा अमर है और अमर रहेगी। इनके पदचिह्नों पर चलकर ही राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। डा. विश्व प्रकाश मिश्र ने वीर कुंवर सिंह को जननायक योद्धा बताया।
इस अवसर पर अवकाश प्राप्त प्राचार्य डा. गजेंद्र पाल सिंह, डा. हरेंद्र प्रताप सिंह, डा. पद्माकर सिंह, अवध नारायण सिंह, रामकवल सिंह, श्रीराम सिंह, हरेराम सिंह, बीरेंद्र कांत सिंह, बैजनाथ प्रसाद, हरिशंकर सिंह, तारकेश्वर प्रसाद, अंबिका पांडेय, फत्तेह बहादुर सिंह, वीरा प्रसाद को प्रबंधक सुरेश बहादुर सिंह एवं प्राचार्य डा. अंजनी कुमार सिंह ने स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्रम् से सम्मानित किया। इस मौके पर डा. राणा प्रताप सिंह, डा. सत्यप्रकाश सिंह, डा. अशोक कुमार सिंह, डा. सच्चिदानंद राम, डा. हरिशंकर सिंह, डा. शैलेश पांडेय, डा. सीके सिंह समेत शिक्षक व शिक्षिकाएं मौजूद रही। संचालन डा. अजय बिहारी पाठक एवं आभार प्रदर्शन डा. मंजूरानी सिंह ने किया।
उधर, कालेज में ही छात्रों ने गुरूवार को आयोजित गोष्ठी मेें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर सिंह के कृतित्व एवं व्यक्ति पर प्रकाश डाला। छात्रसंघ महामंत्री आशुतोष ओझा ने कहा कि कुंवर सिंह हमारे प्रेरणा स्रोत हैं।
गोष्ठी में पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र यादव, धनंजय सिंह विसेन, जैनेंद्र पांडेय मिंटू, सत्यप्रकाश सिंह मणि, दीपक यादव, रवि तिवारी, सागर सिंह राहुल, आलोक पांडेय, ढोलन तिवारी, विपिन सिंह, रिंकू पांडेय, मुकेश गिरि, राहुल ओझा, कुंज बिहारी तिवारी आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता चंदन यादव और संचालन आशुतोष ओझा ने किया।