नगर के जापलिनगंज मोहल्ला स्थित एक दुकान में बिक्री के लिए रखा गया कपड़ा का झोला और कैरी बैग।
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बलिया। बेशक 75 माइक्रोन से कम क्षमता वाली पॉलिथीन सहित 19 प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लागू हो गया। इससे कपड़ा व पेपर बैग की मांग बढ़ने लगी है। पॉलिथीन (कैरी बैग) का उपयोग भी बंद नहीं हुआ है।
विश्व पेपर बैग दिवस 12 जुलाई को मनाया जाता है। प्लास्टिक व पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद होने के बाद पेपर बैग और कपड़ों के थैले की मांग जरूर बढ़ी है लेकिन शहर में पेपर बैग का एक भी कारखाना नहीं है। घरों में बासी कागज व अखबार से लिफाफा बनाने का काम चल रहा है। इस लिफाफे (ठोंगे) जिसका उपयोग छोटे दुकानदार करते हैं। कपड़ा के थैले व कैरी बैग बनाने का कारखाना चला रहे राजेश बताते हैं कि पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद भी बैग की मांग में खास इजाफा नहीं हुआ है लेकिन उपयोग बढ़ने के आसार हैं। वे बताते हैं कि 1000 किलो कागज बैग प्रतिमाह बना रहे हैं। उनका लक्ष्य 2500 किलो प्रतिमाह कागज बैग बनाने का है। सहालग के दिनों में यह औसत दो टन तक पहुंच जाता है।
जापलिनगंज में कपड़ा बैग बनाने वाले खालसा बैग के करमजीत सिंह के अनुसार शहर में करीब तीन-चार कपड़ा बैग बनाने के छोटे बड़े कारखाने हैं। पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद मांग लगातार बढ़ रही है। भविष्य में इसमें इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि रिटेल काउंटरों पर डिमांड ज्यादा बढ़ी है।
- बाजार में पॉलिथीन प्रतिबंधित हैं। मगर सरकार को चाहिए कि उन कंपनियों के उत्पादों की पैकिंग पर भी रोक लगे, जो पॉलिथीन में आती है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। सिर्फ छोटे दुकानदार को ही इस कानून के नाम पर परेशान न किया जाए।
-मंजर सिंह, जिलाध्यक्ष, पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल,बलिया।