मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव रतन सिंह घर ले जाया गया, वहां आवास के सामने पत्रकारों व ग्रामीणों ने रसड़ा-फेफना मार्ग को जाम कर दिया। सपा व कांग्रेस के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए। पत्रकारों ने एडीएम को ज्ञापन सौंप कर पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी, आरोपियों पर रासुका लगाने के साथ ही उनके घर को जमीदोंज करने तथा मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की मांग की।
इस दौरान मौके पर पहुंचे प्रभारी डीएम राम आसरे ने सीएम की ओर से पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की जानकारी दी। कमिश्नर व मंत्री उपेंद्र तिवारी ने भी मृतक की पत्नी को तत्काल संविदा पर नौकरी, किसान दुर्घटना बीमा के पांच लाख मुहैया कराने का आश्वासन दिया। कहा कि सरकारी की नौकरी की प्रक्रिया व शेष धनराशि के लिए सीएम को पत्र भेजा जाएगा।
वहीं मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि मेरे पुत्र रतन सिंह को साजिश के तहत मेरे गांव के ही सोनू सिंह पुत्र स्व. विश्वनाथ सिंह घर से बुलाकर ले गए जहां मेरे बेटे को लाठी-डंडा से पीटा गया। इसके बाद तमंचा और रिवाल्वर से सिर में गोली मार दी गई। इस घटना को मेरे भाई मनोज सिंह और कौशल कुमार सिंह ने देखा है।