जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार हाईस्कूल में हिंदी और विज्ञान विषय की परीक्षा में सबसे ज्यादा अनपुस्थिति रही। वहीं इंटरमीडिएट की परीक्षा में हिंदी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषय में अनुपस्थित बच्चों की संख्या सर्वाधिक रही।
इस बार बोर्ड की परीक्षा के लिए 132 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा केंद्रों को लेकर भी किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। परीक्षा निर्धारित तिथि 19 फरवरी से 12 मार्च तक चली। प्रयोगात्मक परीक्षा में भी व्यवधान उत्पन्न नहीं हुआ। पिछले साल इसमें गड़बड़ी आई थी। बिना बोर्ड की अनुमति ही एक शिक्षक दूसरे जनपद में प्रयोगात्मक परीक्षा लेने पहुंच गए थे। जिसकी जानकारी होने पर जनपद की काफी भद्द पिटी। हालांकि बाद में उसे मैनेज किया गया। लेकिन इस साल इस तरह की भी गड़बड़ी देखने को नहीं मिली। अंतिम दिन मार्च 12 को इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न कराई गई।
परीक्षा के पहले दिन कम रहे शिक्षक
परीक्षा के प्रथम दिन कक्ष निरीक्षकों को लेकर थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन उसे भी समय रहते ठीक कर लिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बोर्ड परीक्षा में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन उनमें से अधिकतर शिक्षक परीक्षा ड्यूटी करने ही नहीं पहुंचे। जिससे अव्यवस्था दिखी। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार गुप्ता और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी मनीष सिंह की तत्परता के चलते व्यवस्था को संभाल लिया गया। परीक्षा के प्रथम दिन के बाद से स्थिति सामान्य हो गई।
सख्ती के चलते नकल पर लगी नकेल
बोर्ड परीक्षा में प्रशासन की खासी सख्ती रही। जिससे परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावक व नकल कराने वाले गायब रहे। दो साल पहले तक यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल कराने वालों का बोलबाला हिता था। प्रश्न पत्र आउट कराने की भी घटनाएं होती थीं। लेकिन बोर्ड और शासन-प्रशासन की सख्ती के बाद नकलविहीन परीक्षा संपन्न हो सकी।