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Ballia News: कॉलेजों में लागू होगी यूनिफॉर्म व्यवस्था, शुरू होंगे स्वरोजगार पाठ्यक्रम

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लखनऊ स्थित गांधी सभागार जन भवन में जेएनसीयू की समीक्षा बैठक को संबोधित करती कुलाधिपति राज्यपाल
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बलिया। प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन में बैठक हुई। विद्यार्थियों में समानता और अनुशासन की भावना को बढ़ावा देने के लिए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यूनिफॉर्म व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए
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इस दौरान इसमें जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रहित संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। राज्यपाल ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्र सुरक्षा और रोजगारपरक शिक्षा को लेकर कई बड़े और कड़े निर्देश जारी किए।

बैठक में कुलाधिपति ने शिक्षकों को समय पर कक्षाएं लेने और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कहा। महिला महाविद्यालयों के छात्रावासों की स्थिति सुधारने और छात्राओं को असामाजिक तत्वों से सुरक्षित रखने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। कॉलेजों में ऐसी समितियों का गठन होगा, जहां छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं रख सकेंगे।
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कमाई के साथ पढ़ाई

छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से ब्यूटीशियन, मेहंदी, जीएसटी, बिंदी निर्माण, अकाउंटेंसी और मिलेट (बाजरा) आधारित व्यंजन निर्माण जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विलेज वैज्ञानिक कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। कृषि विषय वाले कॉलेजों के छात्रों को अपनी भूमि पर भी ऑर्गेनिक खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गुजरात पीपीपी मॉडल और ''ज्ञान भारतम् अभियान''
जिन कॉलेजों का इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, वहां सुधार के लिए गुजरात सरकार के सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल को उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की दिशा में पहल की जाएगी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों के संरक्षण व पंजीकरण के निर्देश दिए गए हैं। जिसका नोडल संस्थान संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी है।
शिक्षकों के लिए टारगेट

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सभी शिक्षकों को प्रतिवर्ष न्यूनतम दो बुक चैप्टर या शोध पत्र प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। जहां शिक्षकों की कमी है, वहां ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई होगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
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