Uma Kant had made a pledge to give up meat, alcohol Baba
असनवार स्थित कार्यक्रम स्थित पर आयोजित सत्संग में बाबा उमाकांत तिवारी ने देरशाम श्रद्धालुओं को मांस और मदिरा त्यागने का संकल्प दिलाया। बाबा ने कहा कि देश में मांस और मदिरा के प्रयोग से अपराध बढ़ रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सबसे जरूरी है कि हम शाकाहारी बने तभी हमारा चरित्र सुधरेगा।
कहा कि शराब देश और समाज के लिए एक अभिशाप है। मनुष्य के लिए रोजी-रोटी और सुरक्षा की जरूरत है। उनको प्राप्त करने में यह बहुत बड़ा बाधक है। एक हजार बुराई वाले ऐसे चीज को बंद कर देना चाहिए। क्योंकि शराब, शवाब और कबाब चाहता है। मनुष्य का चरित्र जब गिर जाता है तो वह मेहनत और मजदूरी कर नहीं कमाना चाहता है, बल्कि गलत तरीके से कमाए धन को अर्जित करना चाहता है। गलत तरीके से अर्जित किए गए धन से बरकत बंद हो जाती है। ऐसे में हर जगह दूकान, दफ्तर या घर में इसका प्रभाव दिखाई देने लगता है।
मनुष्य का शरीर केवल खुदा के इबादत यानी भगवान के भजन के लिए होता है। अनादि वेद वाणी, देवी दर्शन भी इसी शरीर को सुनाई पड़ता है। जब कोई सच्चा गुरु मिल जाता है और हम सच्चे हृदय से सच्ची इबादत करते है तभी वह सच्चिदानंद खुश होता है। ख्वाहिशों के इबादत से मालिक (भगवान) कभी खुश नहीं होता है। आगे का आने वाला समय खराब है। प्रकृति यानी कुदरत के खिलाफ लोग काम करने लगे है।
तो ऐसे में कुदरत खुद इसकी सजा देने के लिए तैयार हो गई है। अगर इससे बचना और बचाना है तो स्वयं को शाकाहारी एवं सदाचारी बनाना होगा। भगवान ने इंसान बनाया है। इसलिए इंसान से इंसान को प्यार, मोहब्बत करना होगा। सबके अंदर उसी मालिक की दी हुई रूह यानी आत्मा है। उस रूह में खुदा यानी भगवान ही निवास करता है। नश्वर शरीर तो किराए का मकान है। जिसे कितना भी सुंदर बनाओे वह यही रह जाएगा। बेईमानी और धोखाधड़ी से कितना भी कमाओगे वह साथ जाने वाला नहीं है।