थाने से महज 20 मीटर दूर स्थित पुलिस पिकेट के पास सोमवार की रात गश्त पर निकले दो सिपाहियों को तेज रफ्तार पिकअप ने रौंद दिया। जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। हादसा सोमवार क ी रात को हुआ। दो साथियों की मौत से पूरे थाना परिसर में सियापा पसरा हुआ है।
वाराणसी जिले के सारनाथ थाना अंतर्गत खजुरी निवासी सतीश कुमार (30) पुत्र झुलन 25 दिसंबर 2015 से गड़वार थाने में सिपाही के पद पर तैनात थे। जबकि जौनपुर जनपद के केराकत थाना अंतर्गत उदियासन गांव निवासी श्रीमोहन (29) पुत्र हरिहर राम बीते जून 2014 से थाने पर तैनात थे।
क्षेत्र में बढ़ती हुई चोरी की घटनाओं को देखते हुए एसओ के निर्देश पर सोमवार की रात करीब साढ़े बारह बजे दोनों रात्रि गश्त पर निकले थे। अभी दोनों बाइक पर सवार होकर थाने से बाहर निकले ही थे कि पुलिस पिकेट के पास सामने से आ रही तेज रफ्तार पिकअप दोनों को रौंदते हुए पुलिस पिकेट से जा टकराई।
जिससे दोनों सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक पिकअप को मौके पर छोड़कर भाग गया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया। उधर हादसे की खबर सिपाहियों के घर वालों को मिलते ही उनके घरों में कोहराम मच गया। तड़के सुबह परिवार के सदस्य थाने पर पहुंच गए और गमगीन माहौल के बीच रूदन-क्रंदन शुरू हो गया।
सड़क हादसे में मरे दोनों सिपाही अपने-अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। कांस्टेबिल सतीश कुमार के परिवार में पत्नी नगीना देवी के अलावा तीन छोटे-छोटे बच्चे सोना (08), शिवम (05) तथा संस्कृत (03) हैं। सतीश दो भाइयों में छोटा था, बड़ा भाई प्रमोद कुमार किसानी का काम करता है।
वहीं दूसरे सिपाही श्रीमोहन की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके परिवार में पत्नी सुनीता देवी और बच्चे अंशू (08), आरूषि (04) तथा अंकिता (01) के आंखों के सामने अंधेरा छा गया है। अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी छोटे भाई त्रिलोकी पर है। दोनों के परिवारों में जहां हादसे से जहां कोहराम मचा है, वहीं गांव में गम के बादल छाए हैं।
सोमवार की रात गड़वार थाने के पास हादसे में दो सिपाहियों की मौत ने पूरे इलाके को भले ही झकझोर दिया हो और लोग घटना स्थल पर पहुंच गए, लेकिन जनपद के आला अफसर देर तक खामोशी साधे रहे। इन सिपाहियों की मौत पर कोई बड़ा नेता तक वहां नहीं पहुंचा।
घटना की खबर के बाद दूर-दूर तक गांव के लोग मौके पर पहुंच गए थे। घटनास्थल पर पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने मंगलवार की दोपहर तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। दोपहर 12 बजे के बाद डीआईजी उमेश कुमार श्रीवास्तव के पहुंचने तथा मृतकों के परिवार वालों से मिलने और घटना के संबंध में जानने के बाद महकमे के कर्मचारियों का रोष कम हुआ।
गड़वार से लेकर ताखा पुलिस चौकी तक मुख्य जगहों पर स्पीड ब्रेकर का न होना ही हादसे की मुख्य वजह बना। इस इलाके को डेंजर जोन के नाम से जाना जाता है। लंबे समय से लोग यहां स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग करते आ रहे हैं। ऐसा न होना यह यातायात सुरक्षा को मुंह चिढ़ा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि जिस रफ्तार से दोनों सिपाहियों को कुचलकर पिकअप पुलिस पिकेट से टकराई उससे जाहिर है यदि यहां स्पीड ब्रेकर होता तो शायद वाहन की गति इतनी तेज नहीं होती।
हादसे में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों का अंत्य परीक्षण सदर अस्पताल कराया गया। श्रीमोहन तथा सतीश कु़मार के परिवार के सदस्यों के रुदन-क्रंदन से हर किसी की आंखों में आंसू आ गए।
सूचना के बाद मौके पर एडीएम खेमपाल सिंह, नगर मजिस्ट्रेट बच्चा लाल मौर्य, सीओ नगर केसी सिंह सहित कई थानों के पुलिसकर्मी पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद शवों को पुलिस लाइन लाया गया, जहां उन्हें गार्ड आफ ऑनर की सलामी दी गई।
सिपाहियों को अंतिम विदाई देते वक्त डीआईजी उमेश कुमार श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद अंसारी, सीडीओ के बालाजी, एडीएम खेमपाल सिंह, सीओ केसी सिंह, सीओ सदर बाबू लाल यादव, सीओ रसड़ा श्रीराम, प्रतिसार निरीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह सहित पुलिस कर्मियों ने पुष्प चक अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों को तांता लगा रहा। डीआईजी श्रीवास्तव ने मृतक के परिवारीजनों को तात्कालिक सहायता के रूप में 10-10 हजार का चेक किया। इसके उपरांत दोनों के पार्थिव शरीर उनके परिवार के सदस्यों के साथ पैतृक गांव के लिए रवाना कर दिया गया।