बैरिया। जिलाधिकारी के आदेश को कोषागार के कर्मचारियों, अधिकारियों ने ठेंगा दिखया है। नलकूप विभाग के एक अमीन को जीपीएफ से घर बनाने के लिए लोन नहीं दिया गया। इससे क्षुब्ध अमीन की पत्नी मुख्यमंत्री को शिकायत कर कोषागार के अधिकारियों व कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया।
ज्ञात हो कि नलकूप विभाग के बैरिया कार्यालय पर तैनात अमीन विनय सिंह ने अपने जीपीएफ से लोन स्वीकृत करने हेतु आवेदन दिया था। वहां भी लेनदेन के चक्कर में उनकी पत्रावली को रोका गया, लेकिन जब जिलाधिकारी से विनय सिंह ने गुहार लगाई तो उनका जीपीएफ का लोन पत्रावली स्वीकृत कर भुगतान के लिए कोषागार में भेज दिया गया। वहां भी सुविधा शुल्क के लिए अड़ंगा लगाया गया, तब अमीन की पत्नी ऊषा देवी ने जिलाधिकारी से इस बाबत शिकायत की। जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने तत्काल जीपीएफ ऋण भुगतान का निर्देश दिया।
बावजूद इसके कोषागार के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पत्रावली लौटा दिया। पिछले छह महीने से अपने ही फंड के पैसे लोन के रूप में लेने के लिए विभिन्न कार्ययों के चक्कर लगाकर परेशान अमीन विनय सिंह के पत्नी ने मुख्यमंत्री को प्रतिवेदन भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।