मुख्यमंत्री ग्रामीण इलाकों को 16 घंटे विद्युत आपूर्ति करने की कोशिश में लगे हैं लेकिन बिजली विभाग के अभियंताओं को उनके इस मिशन की जरा भी परवाह नहीं है। फेफना के विधायक उपेंद्र तिवारी ने 32 जगहों पर नए ट्रांसफार्मर लगाने के लिए अपनी निधि से रकम जारी की लेकिन
एक-दो जगहों को छोड़कर कहीं भी ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए। अभियंता कह रहे हैं कि जल्द ही काम कराया जाएगा जबकि विधायक की सूची में ऐसे भी काम हैं, जिनकी धनराशि तीन साल पहले जारी की गई थी।
सूबे में नई विद्युत उत्पादन इकाइयां बनाई जा रही हैं। ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क को दुरुस्त किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने सूबे में अधिक बिजली देने का वादा किया।
इसके बावजूद जहां बिजली पहुंचनी है, वहां विभागीय अधिकारी नेटवर्क दुरुस्त करने के लिए जरा भी फिक्रमंद नहीं दिखाई दे रहे हैं। फेफना विधायक उपेंद्र तिवारी ने ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मरों की बदहाली को देखते हुए 32 ट्रांसफार्मर लगाने के लिए रकम जारी कर दी।
उन्होंने ग्रामसभा धनौती सलेम के कटइया, बदनपुरा चौहान बस्ती और नूरपुर ग्राम सभा के होल का पुरा बस्ती में 25-25 केवीए के ट्रांसफार्मर के लिए आठ लाख रुपये अपनी निधि से जारी किया। धनराशि जारी होने के ढाई साल बाद भी विभाग ट्रांसफार्मर नहीं लगा पाया।
इसी प्रकार ग्रामसभा कारोबाजार में 100 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाने, नरही के कुछ इलाकों के विद्युतीकरण, भरौली में 250 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने के लिए और विद्युतीकरण के लिए के लिए 11 लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि वर्ष 2014 में जारी की। नसीरपुर कला हरिजन बस्ती, कुर्थिया में ट्रांसफार्मर लगाने थे
लेकिन इस धनराशि का इस्तेमाल विभाग ने नहीं किया। लोग अंधेरे में जीवन काटने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जबकि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य ज्योति योजना के तहत हर मजरे का विद्युतीकरण किया जाना है। एेसे में अब विभागीय पर ही निर्भर है।