जयप्रकाशनगर। जन नायक जयप्रकाश नारायण का गांव अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। शासन-प्रशासन की उदासीनता को देखते हुए कटान के मुहाने पर खड़े इस गांव को बचाने की जिम्मेदारी यूपी और बिहार के ग्रामीणों ने स्वयं उठा ली है। अब वे चंदे की चट्टान से घाघरा की कटान को रोकेंगे। रविवार को सिताबदियारा के लाला टोला स्थित जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि पर हुई महापंचायत में चंदा संग्रहण अभियान का शुभारंभ हुआ।
महापंचायत को संबोधित करते हुए भागीरथ प्रयास कमेटी के अध्यक्ष श्रीराम यादव ने कहा कि कटान से निजात पाने के लिए पांच से छह लाख रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए बिहार के एक मिस्त्री से बात हो चुकी है। उसने कहा है कि बांस का बंडल बनाकर घाघरा की धारा को मोड़ कर गांव को कटान से बचाया जा सकता है।
क्षेत्र के लोग इसके लिए पैसा एकत्र करने में जल्द ही जुट जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। यादव ने कहा कि यह निर्णय कटान से परेशान और सरकार के असहयोगात्मक रवैए के कारण लिया गया है। शासन-प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने भी इस बारे में मात्र आश्वासन ही दिया है।
किसी ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है। जबकि प्रदेश में इस समय जेपी के कभी सहयोगी रहे लोगों की ही सरकार है। उन्हीं का नाम लेकर लोग सत्ता में आए हैं। लेकिन कोई उनके गांव का अस्तित्व बचाने के लिए गंभीर नहीं है।
महापंचायत में सबसे पहले आठगांवा निवासी मजदूर शिवमंगल प्रसाद ने 251 रुपये का चंदा देकर योजना का शुभारंभ किया। महापंचायत में मुखिया प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह, मनोकामना सिंह, सुदर्शन राम, प्रभुनाथ सिंह, ददन यादव, सुरेंद्र सिंह, नीलमणि पांडेय, लौहर राम, श्रीमोहन पांडेय, रामायण यादव, सिसनाथ यादव, मुनर यादव, श्रीराम यादव, रामनरेश चौधरी, चंद्रभूषण सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। बैठक का संचालन लियाकत अली ने किया।