बलिया जिला महिला चिकित्सालय में गर्भवतियों को थायराइड की जांच प्राइवेट लैब से करानी पड़ रही है। महिला चिकित्सालय में थायराइड जांच की सुविधा ही नहीं है। ये हाल तब है जब यह बीमारी गर्भवती महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है और इसकी वजह से गर्भस्थ शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। जीवन शैली में बदलाव सहित कई समस्याओं से महिलाओं को जूझना पड़ रहा है। आने वाले दो से तीन माह में मशीन आने के बाद जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
गले में पाई जाने वाली थायराइड ग्रंथि सामान्य कार्य करना बंद कर देती है तो थायराइड की समस्या होती है। जिला महिला चिकित्सालय में रोजाना 630 से अधिक गर्भवती ओपीडी में इलाज कराने आती हैं। इसमें 15 प्रतिशत को थायराइड होने का पता ही तब चलता है जब गर्भ ठहरने में लेट या गर्भावस्था के दौरान उनकी थायराइड जांच होती है।
महिला चिकित्सालय में थायराइड जांच की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में गर्भवतियों को थायराइड की जांच प्राइवेट लैब से करानी पड़ती है। जहां पांच से आठ सौ रुपया खर्च करना पड़ता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दीपिका गुप्ता ने बताया कि तितली के आकार की यह ग्रंथि वोकल गार्ड के नीचे पाई जाती है और शरीर के मेटाबालिज्म को नियंत्रित करती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं मे थायराइड ज्यादा होती है। इससे मां व बच्चों को खतरा रहता है। समय के पूर्व प्रसव और गर्भ ठहरने में परेशानी होती है। ज्यादा ब्लीडिग होती है। गर्भ में पल रहे बच्चों का विकास नहीं होता है।
चिकित्सक के सलाह पर नियमित जांच कराए और दवाओं को समय से खाएं। संतुलित आहार लें, जिसमें आयोडीन, सेलेनियम और जिंक शामिल हों, नियमित व्यायाम करें, जैसे योग और टहलना, और तनाव से बचें। इसके अतिरिक्त, धूम्रपान और शराब से दूर रहें और पर्याप्त नींद लें। मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन से थायराइड पर असर पड़ सकता है, इसलिए फोन को अपने पास रखकर सोने से बचें। अगर आपके परिवार में किसी को थायरॉइड की समस्या है, तो नियमित रूप से अपनी जांच जरूर कराएं।
क्या बोलीं डॉक्टर
थायराइड की जांच अभी महिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ओपीडी में आने वाली महिलाओं को पास के जिला अस्पताल में भेजा जाता है। जहां जांच निशुल्क उपलब्ध है। शासन को जांच मशीन के लिए पत्र लिखा गया है। दो माह के अंदर थायराइड जांच मशीन व अन्य उपकरण मिलने की पुरी संभावना है। जिसके बाद अस्पताल में जांच मिलने लगेगी।
-डॉक्टर सुमिता सिन्हा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल बलिया