जिले में 25 साल पुराने वीडियो संचालक की हत्या के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
वादी मुकदमा बलदेव यादव निवासी सराना बहादुरपुर थाना उभाव ने प्रार्थना पत्र दिया था कि 21 अप्रैल 1997 को उसका भतीजा मन्ना लाल यादव सोनाडीह मेले में वीडियो चला रहा था। इस दौरान मुस्तफिजुर, नियामत अली, शेख मोहम्मद थाना उभांव वीडियो देखने पहुंचे। वीडियो देखते समय मन्ना लाल यादव से उनका कुछ विवाद हो गया। अभियुक्त उसको देख लेने की धमकी देते हुए चले गए।
शाम को मन्ना लाल वीडियो हाल गेट के पास खड़ा था तभी तीनों व्यक्ति अपने साथ उभांव के टीपू, माजिद, सादाब, जमाल अहमद और दिलीप कुमार श्रीवास्तव निवासी सिकंदरपुर के साथ पहुंचे और उसको चाकू मारकर फरार हो गए। मन्ना लाल को अस्पताल ले गया जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में केस दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की और अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन के न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने अपराध मानते हुए अभियुक्त मुस्तफिजुर की पत्रावली अलग की और अन्य अभियुक्तों के किशोर होने से किशोर न्यायालय बोर्ड को प्रेषित किया। शेष अभियुक्तों को न्यायालय में तलब कर आरोपित किया गया। अभियोजन की तरफ से प्रस्तुत समस्त साक्ष्यों और दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के उपरांत न्यायालय ने दोष साबित पाया। जिससे शेख मोहम्मद उर्फ शेखू, जमाल अहमद और दिलीप कुमार श्रीवास्तव को आजीवन कारावास व 20 हजार के अर्थदंड से दंडित किया।