बांसडीह सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार की रात प्रसव के दौरान तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। लापरवाही का आलम यह था कि तीनों के प्रसव के दौरान स्टाफ नर्स और आशा कार्यकर्ता ही थीं। वहां डा. पीपी सिंह की ड्यूटी थी लेकिन वह अस्पताल में मौजूद नहीं थे।
करीब दस घंटे में तीन नवजातों की मौत की सूचना से गांव के लोगों में गुस्सा व्याप्त हो गया। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने केंद्र में चिकित्सकों के न रहने तथा सुविधाओं की कमी के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होते ही उच्चाधिकारियों में अफरातफरी मच गई। तहसीलदार हीरालाल ने पीड़ित महिलाओं का बयान दर्ज कर मामले की जानकारी डीएम को दे दी।
बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के बकवां निवासी उमेश राजभर अपनी पत्नी सुभावती को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार की रात करीब 11 बजे स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए। उस समय वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। स्टॉफ नर्स रम्भा सिंह और आशा कार्यकर्ता पूनम वर्मा ने सुभावती को जांच के बाद भर्ती कर लिया।
सुभावती का उपचार चल ही रहा था कि इसी बीच आमदौर निवासी सुनीता पत्नी संजीत वर्मा भी रात 12 बजे के करीब गंभीर स्थिति में प्रसव के लिए पहुंची। स्टाफ नर्स ने उसे भी भर्ती कर लिया। अभी दोनों महिलाओं का प्रसव हो नहीं पाया था कि छोटकी सेरिया निवासी शंकर तुरहा भी प्रसव पीड़ा से कराह रही अपनी पत्नी बबली देवी को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
इस दौरान स्टाफ नर्स सभी को यह भरोसा दिलाती रही कि सब सामान्य है और प्रसव सकुशल हो जाएगा। भर्ती होने के एक घंटे बाद सुभावती को नार्मल डिलेवरी से पुत्र पैदा हुआ। लेकिन पैदा होने के चंद मिनट बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी और नर्स ने उसे किसी बालरोग विशेषज्ञ के पास ले जाने को कहा।
अभी परिवार के सदस्य कुछ कर पाते कि नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया। इसके बाद सोमवार की सुबह करीब पांच बजे सुनीता देवी की डिलेवरी भी सामान्य हुई, उसे मृत बालक पैदा हुआ। अभी अस्पताल में उसके परिवार वालों का हंगामा जारी ही था कि करीब आठ बजे बबली ने भी बेटे को जन्म दिया। बच्चे की हालत अचानक बिगड़ने लगी और चंद मिनट बाद उसने भी दम तोड़ दिया। एक के बाद एक तीन नवजात शिशुओं की मौत से स्वास्थ्य केंद्र में हड़कंप मच गया।
सुबह इसकी जानकारी मिलते ही बांसडीह नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह समर्थकों के साथ स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे और चिकित्सकों की लापरवाही के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। चेयरमैन ने इसे चिकित्सकों की घोर लापरवाही तथा स्टाफ नर्स और अवैध रूप से तैनात की गई आशा कार्यकर्ता का घिनौना कृत्य बताया।
इस बीच चेयरमैन ने मुख्य चिकित्साधिकारी समेत जिलाधिकारी को घटना से अवगत कराया। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार हीरालाल घटना की जानकारी लेने स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों तथा स्टाफ नर्स का बयान दर्ज किया। तहसीलदार के आश्वासन पर विरोध प्रदर्शन दो घंटे बाद बंद हुआ।
बांसडीह सीएचसी/पीएचसी के चिकित्सक डा. पीपी सिंह ने बताया कि मैं स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद था लेकिन स्टाफ नर्स ने मुझे घटना की जानकारी नहीं दी। सूचना मिली होती तो नवजात शिशुओं का उपचार समय से किया गया होता।
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