गर्मी की दस्तक के साथ ही आग की घटनाएं बढ़ गई हैं। अग्निशमन विभाग में पर्याप्त संसाधन न होने से आग पर काबू पाना काफी मुश्किल है। कारण कि जिले के करीब 33 लाख आबादी के लिए जिला मुख्यालय सहित कुल तीन अगिभनशमन केंद्र है। ऐसे में तीन अगिभनशमन केंद्र कितना आग पर काबू पा सकता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनपद दो नदियों से घिरा हुआ है। यहां के लोगों की मुख्य जीविका खेती है। लेकिन यहां के लोगों को गंगा और घाघरा नदी की विनाशकारी लहरों के साथ ही अगिभन देवता का भी कहर झेलने की आदत सी हो गई है। कारण कि नदी और आग प्रतिवर्ष लोगों को दर्द दे जाता है। इसमें नरहीं थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव, बैरिया व दोकटी थाना क्षेत्र के सैकड़ों गांव तथा रेवती, सहतवार, सिकंदरपुर, मनियर व बेल्थरारोड तहसील के सैकड़ों गांव इनकी जद में आ जाते है। इनमें सबसे बुराहाल द्वाबावासियों का होता है। इन पर मानव तो दूर ईश्वर की भी कृपा नहीं दिखती है। इनमें सबसे बुराहल कटान पीड़ितों का है, जो कटान के बाद बीएसटी व टीएस बंधे पर झोपड़ी व तिरपाल लगाकर परिवार के साथ किसी प्रकार अपना जीवन यापन करते है। लेकिन यह भी अगिभन देवता को रास नहीं आता है। आग से निबटने के लिए जिला मुख्यालय, रसड़ा, बांसडीह तहसील में अगिभनशमन केंद्र स्थापित है। जबकि बैरिया तहसील में निर्माणाधीन है। वहीं नगरा थाना के निछुहाडीह गांव में अगिभनशमन केंद्र निर्माण के लिए संबंधित कार्यदाई संस्था को शासन द्वारा धन मुहैया करा दिया गया है। वहीं बेल्थरारोड व सिकंदरपुर तहसील में अभी अगिभनशमन केंद्र स्थापित नहीं है। जिले में एफएसओ व चालकों की विशेष कमी है। वहीं नरहीं थाने के सीएचसी पर अगिभनशमन केंद्र खोलने की मांग वर्षो से की जा रही है। इसके अलावा नगर में कुल 30 हाईड्रेंट स्थापित है। लेकिन एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी सड़क में दब गए है। वहीं एक-दो हाईड्रेंट देखरेख के अभाव में चोक लिए हुए है। लेकिन नगर पालिका व जलनिगम इस पर मूकदर्शक् बना हुआ है। इसके अलावा जिले के अधिकांश पोखरे व तालाबों में पानी का अभाव है। गांवों में अंदर अगिभनशमन गाड़ी के आने-जाने के लिए रास्ते का अभाव होता है।