बैरिया। न्यायालय परिसर में पत्नी को तीन तलाक बोलकर वहां से पति के भाग जाने की घटना के चार महीने बाद भी पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाया। वह अपने परिजनों के साथ मुकदमा दर्ज कराने को थाने का चक्कर लगी रही है।
बैरिया थाना क्षेत्र के बैरिया फाटक निवासी अशरफ हुसैन की पुत्री नुसरत बानो का निकाह वाराणसी के अंबिया मंडी निवासी दिलशाद अहमद पुत्र निजामुद्दीन के साथ 21 सितंबर 2018 को मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ हुई थी। आरोप है कि ससुराल में नुसरत को दहेज के लिए परेशान किया जाता था। ससुराल वाले खुद पैसा न मांगकर नुसरत बानो से कहकर अपने पिता से तीन लाख रुपये नकद की मांगने को कह रहे थे। जब बहुत परेशान किया जाने लगा तो उसने अपने पिता से मांग कर तीन लाख रुपये अपने ससुराल वालों को दे दी। दो-तीन महीने ठीक-ठाक रहने के बाद फिर नुसरत बानो से पैसे की मांग की जाने लगी।
इस दौरान नुसरत बानो एक सप्ताह ससुराल में रहती तो उसे फिर से मायके भेज दिया जाता। आजिज आकर मायके वालों ने दहेज देने से साफ इंकार कर दिया और बलिया न्यायालय में दहेज उत्पीड़न का मामला दायर किया। दहेज उत्पीड़न के मुकदमे की तारीख 25 मई 2019 को दोनों पक्ष बलिया न्यायालय में उपस्थित हुए। नुसरत बानो उस समय न्यायालय परिसर में बैठी हुई थी कि उसी दौरान उसका पति दिलसाद अहमद उसके सामने आया और तीन तलाक बोलकर चला गया। नुसरत के रोने-चिल्लाने की आवाज पर उनके भाई व पिता वहां पहुंचे तो वह पूरी बात बताई। इसके बाद उसके पति दिलशाद की काफी खोज किया गया लेकिन उसका पता नहीं चल सका। इसी मामले को लेकर नुसरत बानो अपने पिता अशरफ हुसैन के साथ तीन तलाक अधिनियम के तहत मुकदना दर्ज कराने के लिए थाने का चक्कर लगा रही है। इस बाबत एसएचओ बैरिया संजय त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले की पड़ताल के बाद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।