चौकन और छोटकी शेरिया गांव अंतर्गत बागीचे में रखे 6500 धान के बोझ और मड़हे में गुरुवार की रात किसी ने आग लगा दी। मड़हे में दस बोरा धान के साथ ही चौकी आदि भी जलकर राख हो गई। आसपास के लोग जब तक मौके पर पहुंचते तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना पर पहुंचे अग्निशमन दस्ते ने किसी तरह से आग पर काबू पाया।
थाना क्षेत्र के चौकन गांव निवासी मदिल राजभर प्रतिदिन की तरह बागीचे में रखे धान के बोझ की रखवाली कर रहा था। गुरुवार की रात वह खाना खाने के लिए अपने घर आ गया। इसी बीच किसी ने बगीचे में रखे धान के बोझ में आग लगा दिया। अभी लोग कुछ समझ पाते तब तक शरारती तत्वों ने अलग-अलग स्थानों पर छह जगह रखे धान के बोझ को जला दिया। जिसमें मदिल राजभर के चार बोझ, काशी राजभर के 100 बोझ, फेंकू के 150 बोझ, कैलाश के 160 बोझ, त्रिवेणी के 80 बोझ, रामबचन के 200 बोझ, राजेंद्र के 80 बोझ, जगनारायण के 140 बोझ, चनेश्वर राजभर 110 बोझ, शंकर राजभर के दो सौ, मनोज के 165, नंदलाल के एक सौ, वीरेंद्र 180, शिवनाथ के 135, मुन्ना के 70, योंगेद्र के 40, हरेराम के 90, रामजी 60 एवं राधेश्याम नट के 140, सतरी के 110, अमर नाथ 30, गोविंद नट 40, गिरिजा के 30, दीनानाथ 100 बोझ, धुरंधर नट 120 बोझ सहित मड़हे में रखा चौकी, बिस्तर, जल कर राख हो गया। उधर चुनावी रंजिश को लेकर अराजकतत्वों ने छोटकी शेरिया गांव में बागीचे में दो स्थानों पर रखा धान के बोझ में आग लगा दिया।
जिसमें ऋषिदेव चौरसिया के एक मड़हे और उसमें रखे चौकी के साथ 400 धान के बोझ में आग लग गया। अभी लोग कुछ समझ पाते तक आग ने विकराल रूप धारण लिया। जिसमें मंजीत सिंह 500, योगेंद्र माली के 100, विशुनदेव चौरसिया के 90, वीरेंद्र के 180, सुमेर चौरसिया के छह, रामसकल वर्मा के 80, चंद्रमा रंगवा के 90 जीतन सिंह दो सौ, भिखारी ंसिंह के 180 बोझ, संतोष चौरसिया के 170, श्याम लाल के 165, जयकिशुन 60, सुकेश माली के 85 धान का बोझ जलकर राख हो गए। लोगों ने घटना की सूचना पुलिस सहित अग्निशमन दल को दी।
ग्रामीणों और अग्निशमन दल के काफी मशक्त के बाद आग पर किसी तरह से काबू पाया गया। पीड़ितों की माने तो साढ़े छह हजार के धान के बोझ को चुनावी रंजिश में जलाया गया है। पुलिस छानबीन में जुट गई। बांसडीह रोड : थाना क्षेत्र के चौकन गांव और छोटकी शेरिया में गुरुवार को अराजकतत्वों ने धान के बोझ को आग लगा दिया। सूचना के तीन घंटे बाद अग्निशमन दस्ते की गाड़ी घटना स्थल पर पहुंची, तब तक आग ने पूरे धान के बोझ आग ने अपने आगोश में ले लिया था। पीड़ित राजमतिया देवी, अमर नाथ आदि लोगों ने आरोप लगाया कि जब अग्रिशमन दस्ता यदि समय से घटना स्थल पर पहुंच गया होता तो धान के कुछ बोझों को बचाया जा सकता था।