बलिया। बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांव में जिवितपुत्रिका व्रत के पूर्व मडुआ के आटे की लिटी-रोटी खाने से बीमार पड़े 66 लोगों की हालत में अब सुधार है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मडुआ के आटे और तैयार रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। ग्रामीणों की सूचना के आधार पर बीज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में इस्तेमाल होने वाले थायरम रसायन की मौजूदगी की भी जांच कराई जा रही है। हालांकि, अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं है। सभी की निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
जिवितपुत्रिका व्रत से पहले दोनों गांवों में मडुआ का आटा खाने के करीब आधा से डेढ़ घंटे बाद एक-एक कर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हुईं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त जेपी सिंह ने बताया कि दुकानदार और बीमार लोगों के घरों से लिए गए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। आटे की जांच में थायरम समेत अन्य विषैले तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। संवाद