बांसडीह। लॉकडाउन में फंसे लोगों को सरकार सूचीबद्ध तरीके से उनके गांव भेज रही है। प्रवासी मजदूरों को मेडिकल परीक्षण करने व उनको गांव के ही सरकारी व निजी स्कूलों क्वांरटीन किया जा रहा है। लेकिन वहां उनके रहने व खाने के माकूल इंतजाम नहीं हैं। बतौर उदाहरण मैरीटार गांव के स्कूल के शौचालयों में ताला बंद है। कई स्कूलों में बिजली व पंखे का इंतजाम नहीं होने से लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। केवटलिया कला में तो प्रधान द्वारा स्कूल ही नही खोलवाया गया। उस गांव के प्रवासी मजदूर पोल्ट्री फार्म में रहने को विवश हैं। इसके अलावा किसी भी क्वारंटीन सेंटर पर कम्नियुटी किचेन नहीं चल रहा है। घर के लोग व उस गांव के समाजसेवियों की ओर से खाना आदि के इंतजाम किए जा रहे हैं।
इस बाबत उपजिलाधिकारी बांसडीह दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि नया शासनादेश आया है कि जो भी प्रवासी मजदूर बाहर से आ रहे हैं वे अनावश्यक स्कूलों व अन्य स्थानों पर न रहें। वे मेडिकल करा कर अपने अपने घर चले जाएं और वहीं होम क्वारंटीन रहें।