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न हो रही जांच, न दी जा रही दवा

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नवानगर। सरकार द्वारा कोविड-19 के लिए गांव में किए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत गठित की गई निगरानी समितियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। निगरानी समिति की बैठक प्रधानों के घर तक ही सिमट कर रह गई है न तो किसी गांव में जांच हो रही है और न ही किसी गांव में दवा वितरित किया जा रहा है।
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सरकार ने सरकारी कर्मचारी व जनप्रतिनिधियों को मिलाकर गांव में एक निगरानी समिति का गठन किया है। जिसको गांव में बाहर से आने वाले लोगों के कोविड-19 वन टाइम सेंटर पर रहने हेतु व्यवस्था करने तथा लाखों रुपये की लागत से गांव में खरीदे आक्सी मीटर, थर्मामीटर से जांच कर दवा वितरित करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन निगरानी समिति की बैठक प्रधानों के घर तक ही सिमट कर रह गई है न तो किसी गांव में जांच हो रही है और न ही किसी गांव में दवा वितरित किया जा रहा है। पिछले साल प्रवासी श्रमिकों के लौटने पर गांवों में निगरानी समितियों का गठन कराया गया था। प्रधान की अध्यक्षता में गठित समिति में पंचायत सचिव, एएनएम, आशा बहू, लेखपाल, अध्यापक को शामिल किया गया था। ताकि बाहर से आने वाले लोंगों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जा सके। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुए पंचायत चुनाव में अधिकांश गांवों में नए प्रधान बन गए। लिहाजा अधिकतर नए प्रधानों को इसकी जानकारी तक नहीं है।
निगरानी समितियों की बैठक गांव में खुले स्थान पर कराने का निर्देश दिया गया है। गांव में बाहर से आने वाले लोगों की जांच करने का अधिकार निगरानी समिति करेगी। - अनिल कुमार वर्मा, सहायक विकास अधिकारी नवानगर व पंदह ब्लॉक।
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