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तो अधर में लटक जाएगा दोहरीकरण कार्य

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रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की योजना बना ली है। यदि समय रहते पुराना ट्रैक अपनी पूर्व स्थिति में नहीं आया तो छपरा-वाराणसी के बीच ट्रैक दोहरीकरण का वर्षों से लंबित चल रहा कार्य फिर अधर में ही रह जाएगा।
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वाराणसी-छपरा रेल खंड पर बलिया-बांसडीहरोड रेलवे स्टेशन के बीच शुक्रवार को दोबारा रेल पटरी धंसने की स्थिति आने के बाद ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था। शनिवार को करीब दो किलोमीटर तक पुरानी रेलवे लाइन को हटाकर नई बिछाई गई लाइन से जोड़ दिया गया। बताया जाता है कि बलिया-बांसडीहरोड रेलवे स्टेशन के बीच 61/4 किमी खंभा के समीप एक बार फिर ट्रैक के पास दलदल हो गया है। इसके बाद रेलवे प्रशासन रेल पटरी दुरुस्त करने की कवायद में जुट गया। करीब 20 बोगी गिट्टी डाला गया, लेकिन इसके बावजूद रेल पटरी सही नहीं हुई।
इसके बाद अधिकारियों के निर्देश पर शनिवार की सुबह नई बिछाई गई लाइन को 61/5 किमी खंभा से 59/3 किमी खंभा करीब दो किमी तक पुरानी लाइन को हटाकर बिछाई गई नई लाइन से जोड़ दिया गया। इस दौरान 24 विद्युत नया खंभा लगाने का कार्य किया जा रहा है। रेल कर्मचारियों ने बताया कि ट्रैक सही कर दिया गया है शीघ्र ट्रेन चालू कर दी जाएगी। लेकिन यहां अब ये सवाल खड़ा हो गया है कि यदि पुराना ट्रैक सही नहीं हुआ तो क्या होगा? क्या रेलवे को एक और ट्रैक बनाने की कवायद करनी होगी? यदि ऐसा हुआ तो रेलवे इसके लिए बजट की व्यवस्था कहां से करेगा? कोई वैकल्पिक व्यवस्था होगी या एक बार फिर रेलवे बजट सत्र में इसकी स्वीकृति की कवायद में जुटेगा? फिलहाल इन सवालों का जवाब रेल अधिकारियों के पास नहीं है। वे तो बस ट्रेनों के कैंसिल होने, आंशिक कैंसिल होने या मार्ग परिवर्तित होने की बात कर रहे हैं। टेक्निकल सवालों को लेकर उनका एक ही जवाब है कि यह तो बड़े अधिकारियों के लेवल की बात है और वे ही तय करेंगे कि क्या करना है। इस समय मौके पर पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी डिवीजन के डीआरएम वीके पंजियार समेत कई विभागों के अधिकारी जुटे हुए हैं और लगातार सामने आ रही परिस्थितियों पर निर्णय लेने के साथ उच्चाधिकारियों को सूचना दे रहे हैं।
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