विभाग की लापरवाही और घाघरा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से कठौड़ा के पास स्थित रेगुलेटर से बुधवार को एक बार फिर पानी का रिसाव शुरू हो गया। रेग्यूलेटर से पानी का रिसाव होने से किसानों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई है।
बता दें कि गत दिनों रेगुलेटर ठीक तरह से बंद ना होने के कारण हुए रिसाव से अब तक पांच सौ एकड़ से अधिक बोई फसल डूब गई थी। वही सैकड़ों एकड़ क्षेत्र जलमग्र हो गया था। इसको लेकर किसानों में विभाग के प्रति काफी आक्रोश है। काफी हो हल्ले के बाद बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता कुमार गौरव और एसडीओ आरएस यादव ने मौका मुआयना कर उसे दुरुस्त कराने के लिए जेई निमेश गुप्ता को रिसाव को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
विभाग ने बालू से भरी बोरियां रेगुलेटर के पास रखवा दिया, जिसके बाद पानी का रिसाव बंद हो गया। लेकिन इसके बाद विभाग समस्या का स्थायी समाधान खोजने की जगह इसी वैकल्पिक व्यवस्था के भरोसे बैठ गया।
जब एक बार फिर नदी का जलस्तर बढ़ा तो रिसाव चालू हो गया है। विभाग की इस लापरवाही से क्षेत्र के किसानों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि यदि विभाग इसी तरह लापरवाह बना रहा तो किसान अपने खेतों में फसल की बुवाई नहीं कर पाएंगे। आसपास के दर्जन भर से अधिक गांवों की के खेतों में पहले ही 3 से 5 फुट पानी लगा हुआ था अब दुबारा रिसाव से खेतों में पानी बढ़ता जा रहा है।
इससे किसान भयजदा हैं। रेगुलेटर के फाटक से पानी के रिसाव से कठौड़ा गांव निवासी बैजनाथ, मारकंडे राय, अरुणेंद्र राय, प्रदीप द्विवेदी अमरेंद्र राय, उपेंद्र राय, राजाराम राजभर ,हरिंदर प्रसाद ,शिवजीराम, पारस जायसवाल ,रामेश्वर मल्लाह, मुन्ना राय, प्रवल प्रताप राय, पप्पू राय, बड़कू राय,केदार मल्लाह, जयप्रकाश राय, रामजन्म राय, संजय राय, विनोद राय, रामजन्म पटेल आदि की सैकड़ों एकड़ फसल डूब चुकी है।