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मौसम हो रहा गर्म, आने लगी आम में बौर

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बलिया। पिछले तीन दिनों से मौसम में गर्माहट आने लगी है। चढ़ता पारे वाला यह मौसम देर से बोई गई रबी फसलों को प्रभावित कर सकती है। वहीं आम के मंजरे के लिए काफी लाभदायक है। इससे पैदावार अच्छी होने की संभावना जताई जा रही है।
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इस वर्ष पिछले महीनों में हुई लगातार बारिश व बाढ़ के बाद रबी की फसलों की बोआई भी देर से हुई। पिछले दिनों में लगातार मौसम में उतार-चढ़ाव होता रहा। हालांकि रबी की फसलों के लिए लाभदायक ही रहा। अब मौसम में धीरे-धीरे गर्माहट आने लगी है। इसको लेकर किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। किसानों के अनुसार गर्मी बढ़ने से देर से बोई गई रबी की फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है क्योंकि फलियां सूखने लगेंगी। किसानों ने बताया कि आम के पेड़ों पर बौर लगने लगे हैं। बताया कि माघ महीने के अंतिम सप्ताह से आम के बौर लगने शुरू होते हैं। मौसम में गर्माहट से बौर अच्छे होते हैं।
मौसम में बदलाव से रोग लगने की रहती है संभावना
आम के पेड़ों में मंजर (बौर) आना शुरू हो गए हैं, अब समय आ गया है कि मंजरों की देखभाल ठीक ढंग से की जाए। मौसम में परिवर्तन की स्थिति रहती है जिसके चलते आम के मंजरों पर कीट एवं रोग बढ़ने की संभावना अधिक होती है। आम के मंजरों पर खासकर मधुआ कीट, धिया कीट, मृदारोमिल (पाउडरी मिल्ड्यू) आदि रोग लगते हैं। आम के मंजरों की सुरक्षा के लिए अनुशंसित दवाओं का तीन बार छिड़काव सही समय पर करने से इन रोगों पर नियंत्रण किया जा सकता है।
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कीट नियंत्रण के लिए कब करें कीटनाशक का प्रयोग
आम में पहला छिड़काव मंजर निकलने के पहले किसी एक अनुशंसित कीटनाशक से किया जाता है, जिसे किसान पेड़ को धोना कहते हैं । पहला छिड़काव इस तरह करना चाहिए कि कीटनाशी पेड़ की छाल के दरारों में छुपे मधुआ कीट तक दवा पहुंचे, क्योंकि वायुमंडल का तापमान बढ़ने के साथ-साथ इनकी संख्या में वृद्धि होने लगती है। आम के मंजरों पर दूसरा छिड़काव सरसों के बराबर दाना लग जाने पर कीटनाशी के साथ-साथ किसी एक फफूंदनाशी को मिलाकर करना चाहिए जो मंजर को पाउडरी मिल्ड्यू आदि रोग से बचाता है तथा आम के टिकोरे को गिरने से रोकता है। आम के टिकोरे मटर के दाने के बराबर हो जाने पर तीसरा छिड़काव किया जाना चाहिए। आम के मंजर को कीट से बचाने के लिए डायमेथोइड या मेटासिस्टाक 1.5 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा लमीडाक्लोपरिड 17.8 एसएल को 0.4 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
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फरवरी माह आम की फसल के लिए महत्वपूर्ण होता है। आम की फसलों में बौर लगने का समय शुरू हो चुका है। किसानों को समय-समय पर छिड़काव करना चाहिए।
- नेपाल राम, जिला उद्यान अधिकारी, बलिया।
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